Aug 23, 2026 Login

उत्तराखण्डः करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के बीच कथित फर्जीवाड़े का जाल! केदारनाथ यात्रा मार्ग पर नकली शिलाजीत-केसर के कारोबार के आरोप, स्वास्थ्य और धार्मिक विश्वास से खिलवाड़

Uttarakhand: A web of alleged fraud lurks amidst the faith of millions of devotees! Allegations of counterfeit Shilajit and saffron peddling along the Kedarnath Yatra route threaten health and religi

रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक भावनाओं का प्रतीक है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए हिमालय की कठिन चढ़ाई तय करते हैं। लेकिन इसी पवित्र यात्रा के बीच कथित रूप से नकली शिलाजीत, केसर और अन्य उत्पादों का कारोबार श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य, उनकी जेब और उनकी आस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर इन दिनों शिलाजीत, कश्मीरी केसर, जड़ी-बूटियों और अन्य औषधीय उत्पादों के नाम पर बड़ी मात्रा में सामान बेचा जा रहा है। दावा किया जाता है कि ये उत्पाद हिमालय की दुर्लभ जड़ी-बूटियों से तैयार किए गए हैं और अनेक बीमारियों में लाभदायक हैं। लेकिन कई जानकारों और स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि इनमें से बड़ी संख्या में उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता संदिग्ध है तथा कई मामलों में नकली सामान ऊंचे दामों पर श्रद्धालुओं को बेचा जा रहा है। यात्रा मार्ग पर पिछले लगभग दस वर्षों से रोजगार कर रहे हरिद्वार निवासी पप्पू सिंह का कहना है कि चारधाम यात्रा शुरू होते ही राजस्थान, गुजरात, मुंबई, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से लोग अस्थायी रूप से पहुंचते हैं और शिलाजीत, केसर तथा अन्य उत्पादों की बिक्री शुरू कर देते हैं। उनका आरोप है कि इनमें से कई विक्रेता सीजन समाप्त होते ही वापस लौट जाते हैं, जिससे बाद में किसी शिकायत या कार्रवाई की स्थिति में उन्हें तलाशना भी मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि यात्रा मार्ग पर कई बार ऐसे उत्पाद खुलेआम बिकते दिखाई देते हैं जिनकी न तो गुणवत्ता की कोई गारंटी होती है और न ही किसी प्रकार का प्रमाणपत्र। बावजूद इसके, ऊंचे मुनाफे के लालच में श्रद्धालुओं को बड़े-बड़े दावे करके सामान बेचा जाता है। स्थानीय व्यापारी नितिन जमकोली, अशोक सेमवाल का कहना है कि कुछ लोगों की कथित अवैध गतिविधियों के कारण पूरे व्यापारिक समुदाय की छवि खराब होती है। वर्षों से ईमानदारी से व्यवसाय कर रहे व्यापारियों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि प्रशासन यदि नियमित जांच और सत्यापन अभियान चलाए तो ऐसे तत्वों पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है। चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यात्रा मार्ग से गुजर रहे हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग, औषधि नियंत्रण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यात्रा मार्ग पर खाद्य पदार्थों और औषधीय उत्पादों की नियमित जांच हो तो नकली सामान बेचने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है। लोगों का आरोप है कि वर्षों से इस प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर जांच और कार्रवाई के उदाहरण कम दिखाई देते हैं। यही कारण है कि कथित रूप से यह कारोबार लगातार जारी है।


हिमालयी शिलाजीत और असली कश्मीरी केसर के नाम पर हो रहा खेल?
श्रद्धालुओं को यह कहकर आकर्षित किया जाता है कि उन्हें दुर्लभ हिमालयी शिलाजीत या शुद्ध कश्मीरी केसर उपलब्ध कराया जा रहा है। कई दुकानों पर विक्रेता इन उत्पादों को शक्तिवर्धक, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला और अनेक रोगों में लाभकारी बताकर बेचते हैं। प्रसिद्ध पर्यावरण विशेषज्ञ देव राघवेंद्र बद्री का कहना है कि असली शिलाजीत और उच्च गुणवत्ता वाला केसर अत्यंत महंगे और सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं। ऐसे में यात्रा मार्ग पर कम कीमतों या बिना किसी प्रमाण के बेचे जा रहे उत्पादों की जांच आवश्यक है। यदि इनमें मिलावट या नकली सामग्री पाई जाती है तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
आयुर्वेद और खाद्य सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि बिना जांचे-परखे औषधीय उत्पादों का सेवन कई बार स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। नकली या मिलावटी शिलाजीत में रासायनिक पदार्थों की मिलावट होने की आशंका रहती है, जबकि निम्न गुणवत्ता वाला या कृत्रिम रंगों से तैयार किया गया केसर भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि श्रद्धालु केवल प्रमाणित दुकानों और विश्वसनीय विक्रेताओं से ही औषधीय उत्पाद खरीदें तथा किसी भी चमत्कारी दावे पर आंख मूंदकर विश्वास न करें।

करोड़ों की आस्था के बीच विश्वास पर चोट
केदारनाथ धाम की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्रा होती है। ऐसे में यदि किसी श्रद्धालु को नकली सामान बेचा जाता है तो यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि उसकी आस्था और विश्वास पर भी सीधा आघात है। स्थानीय लोगों, व्यापारियों और यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि यात्रा मार्ग पर विशेष अभियान चलाकर शिलाजीत, केसर और अन्य औषधीय उत्पादों के नमूनों की जांच कराई जाए, संदिग्ध विक्रेताओं का सत्यापन किया जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। श्रद्धालुओं का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी धार्मिक गरिमा, पारदर्शिता और अतिथि सत्कार से है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर नकली उत्पादों की बिक्री की शिकायतें न केवल यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं, बल्कि चारधाम यात्रा की साख पर भी सवाल खड़े करती हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है।