ऊधम सिंह नगरः किच्छा में करोड़ों की जमीन हड़पने का आरोप! फर्जी वसीयत से नामांतरण, हाईवे मुआवजा भी लेने का दावा! कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज
किच्छा। उधम सिंह नगर के किच्छा में करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक भूमि को कथित तौर पर फर्जी वसीयत के जरिए हड़पने और बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित भूमि का करोड़ों रुपये का मुआवजा लेने के आरोप में न्यायालय के आदेश के बाद किच्छा पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में कई व्यक्तियों के साथ-साथ वर्ष 2005-06 के दौरान किच्छा चकबंदी कार्यालय में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। मामले के शिकायतकर्ता मानवेन्द्र सिंह, जो बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवाओं में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने के बाद लखनऊ खंडपीठ से वरिष्ठ निबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल कर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके दिवंगत पिता की बहुमूल्य कृषि एवं व्यावसायिक भूमि को फर्जी और अपंजीकृत वसीयत के आधार पर नामांतरण कर दूसरे लोगों के नाम दर्ज करा दिया गया। प्रार्थना पत्र के अनुसार मानवेन्द्र सिंह के पिता नरेन्द्र सिंह का 23 फरवरी 2005 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उस समय वह न्यायिक सेवा में विभिन्न स्थानों पर तैनात थे, इसलिए पैतृक संपत्तियों की देखरेख उनके छोटे भाई के माध्यम से होती रही। सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्होंने संपत्तियों का निरीक्षण किया तो उन्हें पता चला कि किच्छा स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि का बड़ा हिस्सा कथित रूप से 23 नवंबर 2004 की एक वसीयत के आधार पर अन्य लोगों के नाम दर्ज करा दिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस समय यह वसीयत बनाई गई बताई गई, उस दौरान उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे और शाहजहांपुर में डायलिसिस सहित उपचाराधीन थे। ऐसे में उनके द्वारा वसीयत निष्पादित करना संभव नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता के फर्जी हस्ताक्षर कर अपंजीकृत वसीयत तैयार की गई और चकबंदी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से भूमि का नामांतरण करा दिया गया। प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शासन द्वारा 23 अगस्त 2004 के बाद कृषि भूमि से संबंधित अपंजीकृत वसीयत को मान्यता नहीं दिए जाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके थे। इसके बावजूद उसी कथित अपंजीकृत वसीयत के आधार पर भूमि का नामांतरण कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत जब उक्त भूमि का अधिग्रहण हुआ तो संबंधित लोगों ने करोड़ों रुपये का मुआवजा भी प्राप्त कर लिया, जिससे उन्हें और उनके परिवार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा। मानवेन्द्र सिंह का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत उन्होंने वर्ष 2024 के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी, डीआईजी सहित कई उच्च अधिकारियों से की थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद किच्छा पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए गए, जिसके अनुपालन में कोतवाली किच्छा में संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। इस संबंध में किच्छा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रवि सैनी ने बताया कि.न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्राप्त तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस दस्तावेजों, वसीयत, चकबंदी अभिलेखों तथा भूमि नामांतरण की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच कर रही है।