ट्रंप का ग्लोबल 'टैरिफ बम': भारत समेत 60 देशों पर लगाया 12.5% तक अतिरिक्त टैक्स, नई नीति में भारत को मिली थोड़ी राहत
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर बड़ा तहलका मचा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने जबरन श्रम से बने उत्पादों पर नकेल कसने का हवाला देते हुए भारत सहित दुनिया के 60 देशों पर 10% से लेकर 12.5% तक का नया आयात शुल्क (टैरिफ) लागू कर दिया है। यह नया टैरिफ 1974 के ट्रेड एक्ट की 'धारा 301' के तहत लगाया गया है, जो शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी हो जाएगा। यह नया शुल्क उस अस्थायी 10% ग्लोबल टैरिफ की जगह लेगा जो उसी समय समाप्त हो रहा है।
हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जो सामान पहले से ही रास्ते में (In-transit) हैं, उन्हें 28 जुलाई तक इस नए शुल्क से छूट दी जाएगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने इस कड़े फैसले की पृष्ठभूमि साझा करते हुए कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि दशकों की नैतिक अपीलों के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) से मजबूरन मजदूरी की प्रथा पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। अमेरिका में लगभग एक सदी से जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लागू है। अब समय आ गया है कि हमारे तमाम व्यापारिक साझेदार देश भी इस दिशा में ऐसे ही सख्त कदम उठाएं। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह दंडात्मक टैरिफ उन देशों पर लगाया गया है जो अपने यहाँ जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने या ऐसे प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकाम रहे हैं। इस नीतिगत बदलाव में भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में भारत को 12.5% टैरिफ वाले दायरे में रखने का प्रस्ताव था। लेकिन श्रम और मजदूर प्रथाओं से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच हुई सार्थक और सकारात्मक बातचीत के बाद भारत को 10% शुल्क वाली श्रेणी में शामिल किया गया है। अंतिम फ्रेमवर्क के तहत, जिन देशों ने पर्याप्त प्रतिबंध लगाए हैं या आंशिक उपाय अपनाने का वादा किया है, उन्हें 10% की श्रेणी में रखा गया है। भारत के अलावा इस 10% वाले दायरे में ब्रिटेन, कनाडा, मैक्सिको, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, श्रीलंका, जॉर्डन, अर्जेंटीना, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास और त्रिनिदाद एंड टोबैगो शामिल हैं। दूसरी तरफ, जिन देशों में ऐसे उत्पादों को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद नहीं हैं, उन पर 12.5% का भारी-भरकम टैरिफ लगाया गया है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्विट्जरलैंड के भी कुछ विशेष उत्पादों पर 10% या 12.5% का शुल्क लागू होगा। ट्रंप प्रशासन यहीं नहीं रुका है; यूएसटीआर ने 16 देशों के खिलाफ 'सेक्शन 301' के तहत एक नई जांच भी शुरू कर दी है। आरोप है कि इन देशों ने कई सामानों का अत्यधिक उत्पादन कर वैश्विक बाजारों में कीमतें गिराईं, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। जांच पूरी होने के बाद इन पर और अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं। हालाँकि, वैश्विक व्यापार संतुलन और आम जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने तेल और गैस, उर्वरक (फर्टिलाइजर), कुछ खाद्य पदार्थ, स्टील, एल्युमीनियम, कॉपर, ऑटोमोबाइल और 'यूएस-मेक्सिको-कनाडा समझौते' के तहत आने वाले ड्यूटी-फ्री उत्पादों को इस नए टैरिफ से पूरी तरह बाहर रखा है।