उत्तराखण्डः महिला आयोग में बढ़ेगा कामकाज का दायरा! 10 नए पदों के सृजन पर बनी सहमति, 13 जिलों में मजबूत होगी आयोग की पहुंच
देहरादून। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बोर्ड बैठक आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय में संपन्न हुई। बैठक में महिला सुरक्षा, अधिकार संरक्षण, जनजागरूकता, आयोग की कार्यप्रणाली को और मजबूत करने तथा आगामी कार्ययोजना को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में आयोग के बढ़ते कार्यभार को देखते हुए 10 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके अलावा आयोग के सदस्यगण के मानदेय में वृद्धि और स्वच्छता कर्मी के वेतन में बढ़ोतरी से संबंधित प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। बैठक को संबोधित करते हुए आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य महिला आयोग भी सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग की कार्यशैली के प्रति महिलाओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय, ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों से महिलाएं अपनी शिकायतें और प्रार्थना-पत्र लेकर आयोग तक पहुंच रही हैं। शिकायतों की बढ़ती संख्या को उन्होंने इस बात का संकेत बताया कि महिलाएं आयोग को न्याय और संरक्षण के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देख रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला को समयबद्ध सहायता, विधिक परामर्श और न्याय उपलब्ध कराना आयोग की प्राथमिकता है। इसी बढ़ते कार्यभार और महिलाओं की अपेक्षाओं को देखते हुए बोर्ड बैठक में 10 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव पारित किया गया। माना जा रहा है कि नए पदों के सृजन से आयोग के कामकाज को और व्यवस्थित करने तथा शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को मजबूती देने में मदद मिलेगी। बोर्ड बैठक में आयोग के सदस्यगण के मानदेय में वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके साथ ही आयोग में कार्यरत स्वच्छता कर्मी के वेतन में वृद्धि का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। बैठक में आयोग के प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। महिला आयोग की पहुंच को प्रदेश के सभी जिलों तक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के लिए तीनों उपाध्यक्षों को जिलावार दायित्व सौंपे गए हैं। इसके तहत उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत को पौड़ी, टिहरी और रुद्रप्रयाग की जिम्मेदारी दी गई है। उपाध्यक्ष चन्द्रकला तिवारी को उत्तरकाशी और चमोली जिले का दायित्व सौंपा गया है। वहीं उपाध्यक्ष शायरा बानो को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की जिम्मेदारी दी गई है।
आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि उपाध्यक्षों और सदस्यगण अपने निर्धारित जिलों में नियमित रूप से जनसुनवाई, महिला जागरूकता कार्यक्रम, वन स्टॉप सेंटर के निरीक्षण और महिला अधिकार संरक्षण से जुड़े कार्यों का संचालन करेंगे। इससे जिलों में महिलाओं की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर उनके समाधान की प्रक्रिया को गति देने पर जोर रहेगा। बैठक में वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, महिला हेल्प डेस्क, साइबर अपराध से जुड़े मामलों और विधिक जागरूकता कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। बोर्ड ने प्रस्ताव पारित किया कि उपाध्यक्ष और सदस्य निर्धारित जिलों में वन स्टॉप सेंटर की नियमित जनसुनवाई में प्रतिभाग करेंगी। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर महिला अधिकार संरक्षण से जुड़े मामलों में आवश्यक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि आयोग की गतिविधियों को केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित न रखते हुए ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए जनसुनवाई और जागरूकता कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने की कार्ययोजना पर काम किया जाएगा।