उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर हाईकोर्ट सख्त! बीडी पांडे और सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज की दोबारा जांच के आदेश, रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुई खंडपीठ
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। आज मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में हुई। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से पूछा है कि पूर्व के आदेश के क्रम में जन सुविधाओं के आभाव में क्या प्रगति हुई। बीड़ी पांडे हॉस्पिटल का जब आपने दौरा किया था वहां क्या कमियां पाई गईं और उनका कितना निस्तारण किया गया, ये सब कोर्ट को बताएं। वहीं सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज में कमियों पर चंद घंटों में जांच करके रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी, जो सम्भव नही था। इसलिए सचिव स्वास्थ्य को दोबारा से सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज का दोबारा से जांच करने के आदेश करें। पूर्व में की गयी जांच से कोर्ट संतुष्ट नही हुई, जो कमियां जांच में उठाई गयी थी आज की तिथि में वे जस की तस बनी हुई हैं। इसलिए मेडिकल हॉस्पिटल की दोबारा से जांच की जाए, कि वहां पर क्या-क्या जन सुविधाएं उपलब्ध नही है। उसे कोर्ट को बताएं। मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। पूर्व में कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि जन सुविधाओं को दुरस्त करने को लेकर स्वास्थ्य सचिव दो सप्ताह में हॉस्पिटलों का मौका मुआयना करके कोर्ट में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट में उपस्थिति के बाद स्वास्थ्य सचिव द्वारा बीड़ी पांडे हॉस्पिटल का दौरा किया गया, जिसमें कई तरह की खामियां पाई गयी। सुशीला तिवारी मेडिकल हॉस्पिटल में भी वही स्थिति पाई गई, लेकिन उनको जो कमियां मिलीं रिपोर्ट के मुताबिक वह जस की तस बनी हुई है।
कोर्ट ने राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य सचिव से पूछा था कि सरकार ने वर्तमान में कई हॉस्पिटलों से जानकार डाक्टरों का स्थानांतरण कर दिया। लेकिन उन हॉस्पिटलों में उनकी जगह कोई स्पेस्लिस्ट डाक्टर की नियुक्ति नही की गयी। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से पूछा कि किस हॉस्पिटल में क्या स्वास्थ्य सुविधा की कमियां है। दो सप्ताह में उसका जवाब कोर्ट में पेश करें। मामले की सुनवाई पर आज स्वास्थ्य सचिव व अन्य अधिकारी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उनके द्वारा कहा गया कि प्रदेश कि स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारु रूप से चल रही है। रिक्त व स्थानांतरण हुए डाक्टरों के पदों पर शीघ्र सरकार व स्वास्थ्य विभाग नियुक्ति करने जा रहा है। सुनवाई पर जो स्वास्थ्य सचिव द्वारा रिपोर्ट पेश की गयी, उससे कोर्ट संतुष्ट नही हुई। आंकड़ों के मुताबिक जिला हॉस्पिटल नैनीताल में आईसीयू में भर्ती करने की पुरी सुविधा उपलब्ध है। जिसपर कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से कहा कि आज आप नैनीताल में हैं तो आप एक बार उसका मौका मुयाना करें। आंकड़े सही हैं या वर्तमान स्थिति? एक इसीजी के लिए यहां से मरीज को हल्द्वानी रेफर किया जाता है।
आपके कागजों में सब कुछ उपलब्ध है, एक बार देख लें। इसके सुधार के लिए दो सप्ताह के भीतर आपने क्या एक्शन लिया, कोर्ट को शपथपत्र के माध्यम से पेश करें। साथ में कोर्ट ने नैनीताल के सेनेटोरियम हॉस्पिटल को सुपर स्पेसलिस्ट हॉस्पिटल बनाए जाने के लिए अगली तिथि तक अप्रूवल रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुनवाई पर न्यायमित्र की तरफ से कहा गया कि राज्य सरकार ने बीते दिनों राजकीय मेडिकल कालेज सुशीला तिवारी के 16 वरिष्ठ डॉक्टर और बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से कई वरिष्ठ डॉक्टरों का स्थानांतरण कर दिया है। जिसकी वजह से दोनों अस्पतालों के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी जगह अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति नही की गई। जबकि दोनों हॉस्पिटलों में रेफर के केस आते हैं। इसलिए उनके स्थानांतरण पर पुनः एक बार विचार किया जाए। स्थानांतरण होता भी है तो उनकी जगह स्पेसलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की जाय। जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। डाक्टरों का स्थानांतरण वहां किया जा रहा है जो हॉस्पिटल चालू नही हैं। जो हॉस्पिटल चालू हैं उनमे नियुक्ति नहीं की जा रही है।