Oct 08, 2026 Login
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मित्र पुलिस का दुर्व्यवहार बना आम जनता का 'शत्रु'! उत्तराखंड पुलिस की छवि हो रही है धूमिल,कैम्प थाना फिर सुर्खियों में  

The misbehavior of the friendly police became the 'enemy' of the general public! Uttarakhand Police's image is getting tarnished, Camp police station again in headlines

मित्र पुलिस का दर्जा पायी उत्तराखंड पुलिस की वर्दी दागदार हो रही है। बीते कुछ समय में खाकी पर कई ऐसे आरोप लगे हैं, जिसने  मित्र पुलिस की भूमिका पर संदेह पैदा कर दिया है। हल्द्वानी से लेकर ऋषिकेश तक कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जहां पुलिस ने अपनी वर्दी का रौब दिखाकर गलत काम को अंजाम दिया है। इससे आमजन के मन में बनी रक्षक पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। 

मित्रता, सेवा, सुरक्षा उत्तराखंड पुलिस की पहचान है। इसने कई ऐसे काम भी किए हैं जिनके कारण इन्हें तारीफ भी मिली है। कोरोना काल में मैदान से लेकर पहाड़ तक पुलिस का मित्र रूप सामने भी आया। मरीज की जान बचाने के लिए चाहे उसे कंधे पर लेकर अस्पताल पहुंचाना हो, या कई मीलों की दूरी तय कर मरीज के लिए कंधे पर ऑक्सीजन सिलिंडर ले जाना हो, या फिर कोरोना काल में खुद भोजन तैयार कर जरूरतमंदों में बांटना हो उत्तराखंड  पुलिस के द्वारा किए गए कार्यो ने मित्र पुलिस के नाम को  गौरवान्वित किया है। मगर इसी इतर महकमे के कुछ वर्दीधारियों ने अपनी खाकी पर दाग भी लगाए हैं। 

बात यहां पर एक बार आज फिर उस थाने की जो अक्सर अपनी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में रहता है। यहां के पुलिसकर्मी अपने आप को किसी आला अधिकारी से कम नहीं समझते हैं और यही कारण है कि अपराधी हो या फरियादी सभी के साथ अक्सर दुर्व्यवहार करते हुए चर्चाओं में रहते हैं। जनाब थोड़ा रुकिए  उत्तराखंड प्रदेश के जिस मित्र पुलिस की हम बात कर रहे है उस प्रदेश के पुलिस मुखिया डीजीपी अशोक कुमार और उनके अधीनस्थ कई ऐसे अधिकारी हैं जो अपने सरल, सौम्य, व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। इतना ही नहीं  जिस ट्रांजिट कैंप थाने की हम बात कर रहे  है इस ठाणे से संबन्धित जिले के पुलिस मुखिया मंजूनाथ टीसी और एसपी मनोज कत्याल के उत्तम,सरल,सौम्य व्यवहार के कारण ही आज वो लोगों के दिलो  में राज कर रहे हैं । 

बात केवल ट्रांज़िट कैंप ठाणे की की जाए तो  वर्तमान थानाध्यक्ष भी अपने सरल, सहज, व्यवहार के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनके उनके अधीनस्त कुछ निरीक्षक और पुलिसकर्मी अपने दुर्व्यवहार से मित्र पुलिस की छवि को लगातार धूमिल कर रहे है। हाल फिलहाल में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जो चर्चाओं का विषय बना हुआ है । मामला देर रात्रि में एक दुकान पर आग लगने का है। इस मामले में सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने फरियादियों से दुर्व्यवहार करते हुए खुद ही आग बुझाने की हिदायत दे डाली। तो वहीं ट्रांज़िट कैंप थाने के एक चौकी इंचार्ज के दुर्व्यवहार की चर्चा अक्सर सामने आ ही जाती हैं। लेडी सिंघम के नाम से जाने जाने वाली यह चौकी इंचार्ज अक्सर लोगों के साथ दुर्व्यवहार करती हैं। लेकिन अगर आप नेता है  और  खासकर सत्ता पक्ष के  हैं तो इनका व्यवहार काफी सहज और शालीन हो जाता  है। सत्ता पक्ष के नेताओं के लिए तो लेडी सिंघम चौकी इंचार्ज आवाभगत में आतुर रहती हैं। लेकिन वही एक आम आदमी फरियादी बनकर   इनसे न्याय की अपेक्षा रखकर  इनके पास जाता है तो इनका रूखा  व्यवहार  अक्सर चर्चाओं में आ जाता  है।

अभी हाल ही में एक फरियादी को  लेडी सिंघम ने  देर रात अपने ही चप्पल से कूट दिया । हालांकि यह मामला सामने नहीं आया लेकिन आज भी इसके कुछ चश्मदीद इस बात की चर्चा अक्सर करते रहते हैं। इतना ही नहीं चौथे स्तंभ के रूप में जाने जाने वाले पत्रकारों  के साथ तो ये अक्सर दुर्व्यवहार करते हुए नजर आती हैं ट्रांज़िट कैंप ठाणे और वर्दी की किरकिरी न हो जाए इसलिए थानाध्यक्ष इनकी गलतियों पर पर्दा डालते हुए नजर आते है। अगर लॉ एंड ऑर्डर की बात करें तो  लेडी सिंघम की चौकी के कुछ ही दूरी  पर अवैध शराब का कारोबार लगातार फल फूल रहा हैं लेकिन मोहतरमा कभी भी उन पर अपनी नजरें इनायत नहीं करती हैं। हालांकि यह तो उनका विवेक है कि किस पर उनको कार्यवाही करनी है और किस पर नहीं। लेकिन लेडी सिंघम के नाम से जाने जाने वाली यह मोहतरमा अपने दुर्व्यवहार से मित्र पुलिस की छवि को धूमिल करती रहती हैं।  एक दिन पहले भी एक मामले में इनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए तो थानाध्यक्ष फिर से   मोर्चा संभालना पड़ा तब जाकर विवाद खत्म हुआ । ऐसे इनके एक नहीं कई मामले सामने आते जा रहे  हैं। लगातार देखने में आता है कि ट्रांजिट कैंप थाने में आने वाला अधिकतर  पुलिसकर्मी अक्सर लोगों से दुर्व्यवहार के लिए चर्चा बटोर ही लेता है।

वर्तमान समय में ट्रांजिट कैंप के थानाध्यक्ष सुंदरम शर्मा थाने को  स्वच्छ पहचान और जनता को न्याय दिलवाने का केंद्र बनवाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। लेकिन थानाध्यक्ष के अधीन पुलिसकर्मी उनके इस अभियान पर पूरी तरह से दुर्व्यव्यहार के चलते पानी फेरने पर लगे हुए है ।