नैनीताल:कॉपीराइट स्ट्राइक विवाद पर हाईकोर्ट का दो टूक! यूट्यूब को अनुच्छेद-12 के दायरे से बाहर माना,कहा - यूट्यूब निजी मंच, उसके खिलाफ नहीं चलेगी रिट

The High Court's clear stance on the copyright strike dispute! It considers YouTube outside the scope of Article 12 and states that YouTube is a private platform and no writ will be filed against it.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिना पूर्व सूचना यूट्यूब चैनल हटाए जाने के मामले में दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूट्यूब एक निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में उसके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने की। याचिका पौड़ी गढ़वाल निवासी स्वाति उर्फ स्मृति नेगी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि यूट्यूब को उनका हटाया गया चैनल, अपलोड की गई सामग्री तथा उस पर लगाई गई कॉपीराइट स्ट्राइक हटाकर चैनल को पूर्व स्थिति में बहाल करने का निर्देश दिया जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यूट्यूब ने तीन कथित कॉपीराइट स्ट्राइक का हवाला देते हुए बिना किसी नोटिस और बिना पक्ष रखने का अवसर दिए उनका अकाउंट हटा दिया। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया गया।

हालांकि, 4 अगस्त 2026 को सुनाए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और यूट्यूब के बीच संबंध एक निजी अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर आधारित है। यदि उस अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो उसका समाधान सार्वजनिक कानून (पब्लिक लॉ) के तहत रिट याचिका के माध्यम से नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि यह एक संविदात्मक (कॉन्ट्रैक्ट संबंधी) विवाद है और याचिकाकर्ता इसके समाधान के लिए कानून में उपलब्ध अन्य उपयुक्त कानूनी उपायों का सहारा लेने के लिए स्वतंत्र हैं।