उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों के अंशदान की करोड़ों की राशि पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और निगम से तीन सप्ताह में मांगा जवाब

The High Court has taken a tough stand on the contribution of crores of rupees by Uttarakhand Roadways employees and has sought a response from the government and the corporation within three weeks.

उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों के अंशदान की करोड़ों की राशि पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और निगम से तीन सप्ताह में मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में उत्तराखंड रेलवे कर्मचारी यूनियन (रोडवेज कर्मचारी संगठन) के प्रदेश महासचिव अशोक चौधरी की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हुई। याचिका में उत्तराखंड परिवहन निगम की वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों के हितों और राज्य पुनर्गठन के बाद उत्तर प्रदेश से मिलने वाली परिसंपत्तियों के बंटवारे सहित कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता अशोक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2019 में दायर जनहित याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उत्तर प्रदेश से मिलने वाली परिवहन निगम की संपत्तियों का अनुपातिक (प्रोपोर्शनल) बंटवारा नहीं किया गया। उनका दावा है कि लखनऊ स्थित परिवहन निगम की मूल्यवान भूमि में उत्तराखंड का हिस्सा था, जिसकी संभावित कीमत वर्तमान में करीब 850 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। आरोप है कि राज्य सरकार ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर अपेक्षित पहल नहीं की।
याचिका में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच हुए समझौते के तहत मिले 200 करोड़ रुपये का उपयोग कर्मचारियों के हित और निगम को मजबूत करने के बजाय अन्य मदों में किया गया। इसके अलावा देहरादून स्थित रोडवेज वर्कशॉप की भूमि स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए ले ली गई, लेकिन बदले में जो वैकल्पिक व्यवस्था और सुविधाएं देने का आश्वासन था, वह पूरा नहीं किया गया। इससे परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति और कमजोर हुई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान राज्य सरकार ने परिवहन निगम को अनुग्रह राशि तो दी, लेकिन बाद में उसे भी 200 करोड़ रुपये के मद से समायोजित कर लिया, जबकि उस राशि का उद्देश्य निगम को वित्तीय रूप से पुनर्जीवित करना था।
सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की सहकारी समिति से जुड़ा नया मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि रोडवेज कर्मचारियों के वेतन से हर महीने सहकारी समिति के लिए अंशदान काटा जाता है, लेकिन नवंबर 2025 से निगम ने कर्मचारियों के वेतन से राशि काटने के बावजूद उसे समिति के खाते में जमा नहीं किया।
याचिका के अनुसार, इससे समिति पर करीब 6.5 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी हो गई है और उसे लगभग 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज भी वहन करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाले ऋण और अन्य सुविधाओं पर पड़ रहा है।
इन सभी बिंदुओं पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उत्तराखंड परिवहन निगम से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।