अंकिता भंडारी केस में फिर उबालः दिल्ली के जंतर-मंतर पर जबरदस्त प्रदर्शन! लोग बोले- तीन साल बाद भी न्याय अधूरा, पुलिस ने हिरासत में लिए कांग्रेस नेता

The Ankita Bhandari case has erupted again: a massive protest at Delhi's Jantar Mantar! People claim justice is still incomplete even after three years. Police have detained a Congress leader.

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। अंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर रविवार, 26 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मामले में शामिल सभी दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग उठाई। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए गए। मंच की सदस्य कमला पंत ने कहा कि इस जघन्य हत्याकांड को तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पीड़िता को संपूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं की गई। कमला पंत ने यह भी कहा कि एक पूर्व भाजपा विधायक की पत्नी ने सोशल मीडिया पर उस कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक किया, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

मंच की एक अन्य सदस्य निर्मला बिष्ट ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। मंच से जुड़े सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्विस डंगवाल ने भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह मामले के तुरंत बाद संबंधित रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाया गया, वह कई संदेह पैदा करता है। उन्होंने पूछा कि आखिर बुलडोजर चलाने का आदेश किसने दिया और क्या इससे सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई? उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान मंच ने प्रमुख मांगों में कहा कि इस केस की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज द्वारा की जाए। इसके अलावा बचे हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और साक्ष्य मिटाने में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी धीरेंद्र प्रताप को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें लगभग चार घंटे तक पुलिस हिरासत में रखा गया, जिसके बाद रिहा किया गया।