देश में 1 जुलाई से लागू होंगे दवाओं के नए आईपी 2026' मानक! उत्तराखंड के फार्मा हब से हुई देशव्यापी ट्रेनिंग की शुरुआत
हरिद्वार। देशभर में निर्मित और बेची जाने वाली दवाइयों की शुद्धता, गुणवत्ता और सुरक्षा को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए आगामी 1 जुलाई से नया कानून लागू होने जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की शीर्ष संस्था 'इंडियन फार्माकोपिया कमीशन' द्वारा तैयार किए गए नए 'IP 2026' मानक 1 जुलाई से पूरे देश में अनिवार्य रूप से प्रभावी हो जाएंगे। नए नियमों को लेकर दवा निर्माताओं के बीच फैले संशय को दूर करने और उन्हें तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करने के लिए देशव्यापी अभियान की शुरुआत उत्तराखंड के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल हब हरिद्वार से की गई है। बुधवार को हरिद्वार के सिडकुल स्थित एकम्स टाउनहॉल में 'इंडियन फार्माकोपिया कमीशन' और 'एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज' के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय भव्य वैज्ञानिक सम्मेलन और संवादात्मक सत्र (इंटरएक्टिव सेशन) का आयोजन किया गया। इस महामंथन में उत्तराखंड के कोने-कोने से आए फार्मा उद्योग के सैकड़ों प्रतिनिधियों और दवा विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।
सरल शब्दों में कहें तो IP-2026 (इंडियन फार्माकोपिया 2026) भारतीय भेषज संहिता का 10वां संस्करण है। यह भारत में तैयार होने वाली तमाम जीवनरक्षक दवाओं की क्वालिटी, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस और सेफ्टी के लिए तय किया गया एक आधिकारिक और बाध्यकारी कानूनी मानक है। सम्मेलन के मुख्य अतिथि और आईपीसी के निदेशक व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वी. कलेसेल्वन ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा बीते 2 जनवरी को आईपी 2026 के इन नए मानकों को लॉन्च किया गया था। 1 जुलाई से देश की सभी दवा निर्माता कंपनियों के लिए इन अपग्रेड किए गए मानकों और मोनोग्राफ का अक्षरशः पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती वैश्विक आवश्यकताओं और बीमारियों के बदलते स्वरूप को देखते हुए दवाओं में संभावित रासायनिक अशुद्धियों को न्यूनतम (नगण्य) स्तर पर लाना इस नए मानक का मुख्य उद्देश्य है, ताकि मरीजों तक 100% सुरक्षित और असरदार दवाएं पहुंच सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह ने राज्य के फार्मा उद्योग की वैश्विक ताकत का ब्योरा सामने रखा। उन्होंने बताया कि भारत से दुनिया भर को होने वाले कुल दवा निर्यात में अकेले उत्तराखंड की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। यही वजह है कि देशव्यापी जागरूकता और ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत के लिए सबसे पहले देवभूमि के हरिद्वार को चुना गया। ताजबर सिंह ने कहा, "राज्य के सभी दवा निर्माताओं को एक मंच पर लाकर नए तकनीकी मानकों की बारीक जानकारी दी जा रही है, ताकि हमारी कंपनियां समय रहते अपनी लैब्स और उत्पादन इकाइयों में आवश्यक बदलाव कर सकें। इससे आने वाले समय में आम जनता को और भी उच्च कोटि की दवाएं मिलेंगी। एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संदीप जैन ने बताया कि इंडियन फार्माकोपिया कमीशन समय-समय पर दवाओं के स्टैंडर्ड को अपग्रेड करता है ताकि भारतीय दवाओं की साख पूरी दुनिया में बनी रहे। संदीप जैन ने कहा कि इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य फार्मा कंपनियों को नई व्यवस्था लागू करने में आने वाली व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतों को दूर करना था। इस सत्र के बाद दवा निर्माताओं के मन में मानकों को लेकर चल रहे तमाम संशय दूर हो गए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय फार्मा उद्योग की हिस्सेदारी और मजबूत होगी। इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सम्मेलन के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मानित होने वालों में आईपीसी के निदेशक डॉ. वी. कलेसेल्वन, उत्तराखंड के ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह सहित राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे ड्रग विभाग के आला अधिकारी शामिल रहे।