Aug 30, 2026 Login

उत्तराखण्ड में स्वाइन फ्लू ने बढ़ाई टेंशन! 73 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि, स्वास्थ्य महकमा अलर्ट

Swine flu sparks concern in Uttarakhand! Infection confirmed in 73 patients; Health Department on alert.

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के साथ मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के बीच अब स्वाइन फ्लू के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। प्रदेश में अब तक 73 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 67 मामले देहरादून जिले से सामने आए हैं। वहीं नैनीताल में चार और हरिद्वार में दो मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिलों में रैपिड रिस्पांस टीमों को सक्रिय कर दिया है। ये टीमें संदिग्ध मरीजों की जांच, स्क्रीनिंग और निगरानी का काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, स्वाइन फ्लू से संक्रमित पाए गए 73 मरीजों में से 43 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 25 मरीजों का उपचार जारी है। देहरादून जिले में संक्रमण की पुष्टि वाले पांच मरीजों की मौत भी हुई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मृतकों को पहले से ही अन्य गंभीर बीमारियां थीं और स्वाइन फ्लू संक्रमण के बाद उनकी स्थिति बिगड़ गई। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा है। जिलास्तर पर फील्ड टीमों को संदिग्ध मरीजों की जांच और सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही सामुदायिक स्तर पर भी स्क्रीनिंग की जा रही है। मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को इमरजेंसी विंग में इन्फ्लुएंजा के मरीजों के लिए पर्याप्त संख्या में बेड आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्पतालों में ऑक्सीजन सपोर्ट और एंटीवायरल दवा ओसेल्टामीविर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर संक्रमित मरीजों को अलग वार्ड में रखकर उपचार देने की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने कहा कि प्रदेश में इस समय सीजनल इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आ रहे हैं और मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय जागरूक रहने और सावधानी बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम और सर्दियों की शुरुआत में सीजनल इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों में सामान्य तौर पर फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और अधिकांश मरीज करीब एक सप्ताह में स्वस्थ हो जाते हैं। ऐसे में लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के जनरल फिजिशियन डॉ. केसी पंत के मुताबिक स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे हो सकते हैं। वर्तमान में अधिकांश मरीज सामान्य उपचार से स्वस्थ हो रहे हैं। उन्होंने लोगों को सीजनल इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन को लेकर चिकित्सक से सलाह लेने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसके अलावा ऐसे बुजुर्ग या अन्य लोग, जिन्हें पहले से कोई बीमारी है, उन्हें संक्रमण से बचाव को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर या किडनी जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना, जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना, संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखना और हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर उसे दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। स्वाइन फ्लू के साथ-साथ प्रदेश में डेंगू और अन्य मानसून आधारित बीमारियों को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से बातचीत कर उन्हें अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। जिलों में पर्याप्त दवाइयों के साथ ही जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे स्थानों को भी चिह्नित कर रहा है जहां स्वाइन फ्लू या अन्य मौसमी बीमारियों के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही उन जगहों की निगरानी की जा रही है जहां बारिश के बाद पानी जमा हो रहा है, ताकि मच्छरों के पनपने और डेंगू के मामलों को बढ़ने से रोका जा सके।

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में, लेकिन सतर्कता जरूरी
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 73 मामलों की पुष्टि और देहरादून में पांच मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों की जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की रणनीति फिलहाल संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग, संक्रमितों की निगरानी, अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था, पर्याप्त दवाइयों और ऑक्सीजन की उपलब्धता तथा मौसमी बीमारियों की रोकथाम पर केंद्रित है।