Aug 30, 2026 Login

हाल-ए-उत्तराखण्डः कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के गृह क्षेत्र में महिला शौचालय तक नहीं! पीरीयड्स के दौरान युवती को हुई परेशानी तो खुली पोल, सोशल मीडिया पर साझा की आपबीती

 State of Uttarakhand: Cabinet Minister Rekha Arya's home constituency lacks even a women's restroom! The issue came to light when a young woman faced difficulties during her period and shared her or

अल्मोड़ा। यूं तो आज के दौर में महिला सम्मान, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकारी स्तर पर लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन अल्मोड़ा के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में सामने आई एक घटना इन तमाम दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। बाल विकास मंत्री और सोमेश्वर विधायक रेखा आर्या के गृह क्षेत्र माने जाने वाले सोमेश्वर बाजार में महिलाओं के लिए समुचित सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं होने का मामला सामने आया है। हाल ही में माहवारी के दौरान एक युवती की दोस्त को अचानक आपात स्थिति का सामना करना पड़ा। बाजार में सुरक्षित और उपयोगी शौचालय उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे काफी परेशानी झेलनी पड़ी। सोमेश्वर निवासी नेहा खर्कवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की है, जो अब चर्चा का विषय बनी हुई है। नेहा खर्कवाल के मुताबिक वह अपनी दोस्त के साथ बाजार गई थीं। इसी दौरान उनकी दोस्त को अचानक माहवारी शुरू हो गई। स्थिति ऐसी थी कि तत्काल वाशरूम की जरूरत महसूस हुई। दोनों ने पास ही स्थित एक होटल में शौचालय इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी, लेकिन होटल की ओर से उन्हें शौचालय का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्हें सार्वजनिक शौचालय जाने की सलाह दी गई। नेहा खर्कवाल​​​​​​​ के अनुसार होटल से बताए गए सार्वजनिक शौचालय की दूरी करीब 300 मीटर थी। दोनों वहां पहुंचीं तो स्थिति देखकर वे हैरान रह गईं। सार्वजनिक शौचालय में दरवाजा तक नहीं था। ऐसे में माहवारी के दौरान एक युवती के लिए उस स्थान का इस्तेमाल करना संभव नहीं था। यह घटना सिर्फ एक युवती की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। महिलाओं को जब अचानक शौचालय की जरूरत पड़ती है, तो उनके सामने सुरक्षित, साफ और उपयोगी सुविधा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। खासतौर पर माहवारी के दौरान स्वच्छता और निजता का महत्व और बढ़ जाता है।

माहवारी शर्म की बात नहीं
नेहा खर्कवाल​​​​​​​ ने अपनी पोस्ट के माध्यम से इस मुद्दे को महिलाओं की गरिमा और अधिकारों से जोड़ते हुए सवाल उठाया है। उनका कहना है कि माहवारी कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। ऐसे में यदि किसी महिला या युवती को सार्वजनिक स्थान पर अचानक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े तो उसके लिए सुरक्षित और सुविधाजनक शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी, खासकर जेन-जी, अब अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल पूछ रही है। महिलाओं को सम्मान देने की बात केवल अभियानों और नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए जिनका वे जरूरत के समय सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

मंत्री-विधायक के क्षेत्र में व्यवस्था पर सवाल
सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र की यह स्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि क्षेत्र की विधायक रेखा आर्या राज्य सरकार में बाल विकास मंत्री हैं। महिला एवं बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर सरकार की ओर से लगातार जागरूकता और सुविधाओं की बात की जाती रही है। ऐसे में विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख बाजार में महिलाओं के लिए उपयोगी सार्वजनिक शौचालय की स्थिति सवालों के घेरे में आ गई है। महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान से जुड़े अभियानों के बीच सोमेश्वर बाजार की यह तस्वीर व्यवस्था और दावों के बीच अंतर को सामने लाती है। सवाल यह है कि यदि किसी महिला को बाजार में अचानक शौचालय की आवश्यकता पड़े तो उसके पास सुरक्षित विकल्प क्या है? और यदि सार्वजनिक शौचालय मौजूद है, लेकिन उसमें निजता और सुरक्षा के लिए दरवाजा तक नहीं है, तो ऐसी सुविधा का उपयोग महिलाएं किस तरह करेंगी?

महिलाओं के लिए सुरक्षित सुविधा की मांग, व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह मामला सामने आने के बाद अब महिलाओं के लिए बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है। बाजारों में महिला शौचालय केवल सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा बुनियादी अधिकार है। सार्वजनिक शौचालयों में साफ-सफाई, पानी, रोशनी, दरवाजे और पर्याप्त निजता जैसी व्यवस्थाएं होना जरूरी है। सोमेश्वर बाजार में सामने आए इस मामले ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने भी सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर महिलाओं को बुनियादी सुविधा के लिए इस तरह की परेशानी कब तक झेलनी पड़ेगी। यदि सरकार महिलाओं के सम्मान और स्वच्छता को प्राथमिकता देने की बात करती है तो उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। युवती की आपबीती ने सोशल मीडिया के जरिए एक ऐसे मुद्दे को सामने ला दिया है, जिसे अक्सर सार्वजनिक चर्चा में नजरअंदाज कर दिया जाता है। माहवारी के दौरान महिलाओं को सुरक्षित और स्वच्छ स्थान की आवश्यकता होती है। यह किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं, बल्कि सामान्य और जरूरी सार्वजनिक व्यवस्था का हिस्सा है। अब सवाल यही है कि सोमेश्वर बाजार में महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और उपयोगी सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था कब होगी? क्या प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर मौजूदा शौचालय की स्थिति सुधारेगा या महिलाओं को आगे भी ऐसी ही परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा? सोमेश्वर की इस घटना ने महिला सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।