Aug 30, 2026 Login

भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नई ऊंचाई! पीएम मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए बनेगा नया रोडमैप

 India-Uzbekistan relations reach new heights! PM Modi receives Uzbekistan's highest honor; a new roadmap to be created for a comprehensive strategic partnership.

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों उज्बेकिस्तान के दौरे पर हैं। रविवार को उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक, कारोबारी, ऊर्जा, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान की आजादी की 35वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव और वहां के लोगों को बधाई भी दी। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आए। पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘ओली दराजली दोस्तलिक’ से भी सम्मानित किया गया। सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मजबूत और अटूट संबंधों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती और आपसी विश्वास का प्रतीक है। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देश अब अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और अब नए लक्ष्यों के साथ सहयोग के दायरे को और व्यापक करने की जरूरत है। उन्होंने उज्बेकिस्तान की ओर से तैयार की गई उस किताब का भी उल्लेख किया, जिसमें भारत और उज्बेकिस्तान के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों और परियोजनाओं की पहचान की गई है। पीएम मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि दोनों देश मिलकर इन परियोजनाओं और लक्ष्यों को तेजी से आगे बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए विदेश मंत्रियों के स्तर पर एक समन्वय परिषद गठित करने का फैसला किया गया है। यह परिषद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा करेगी और आपसी तालमेल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रधानमंत्री के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक बिजनेस समिट आयोजित करने पर भी सहमति बनी है। इसमें भारत और उज्बेकिस्तान के कारोबारी और उद्योग जगत के प्रमुख लोग शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर तलाशना तथा कारोबारी संबंधों को नई गति देना होगा। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देश यूरेनियम की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए कई समझौतों पर भी काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच तीन ‘सिस्टर-सिटी’ और ‘सिस्टर-स्टेट’ समझौते किए जा रहे हैं। इन समझौतों के जरिए स्थानीय स्तर पर सहयोग, विकास, तकनीक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

व्यापार पहली बार एक अरब डॉलर के पार
वहीं, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने भारत को अपने देश का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के अनुसार, पिछले वर्ष भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार एक अरब डॉलर से अधिक पहुंचा। इसके अलावा हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संयुक्त उपक्रमों की संख्या में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते संपर्क का उल्लेख करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच हर सप्ताह करीब 14 सीधी उड़ानें संचालित होती हैं। उनके अनुसार, सीधी उड़ानों से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ा है और इससे पर्यटन, व्यापार तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी मजबूती मिली है। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने भारतीय नागरिकों के लिए शुरू की गई 30 दिन की वीजा-फ्री सुविधा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कदम से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच पर्यटन, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आसान यात्रा व्यवस्था से दोनों देशों के नागरिकों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ने की उम्मीद है।