Aug 30, 2026 Login

नैनीताल:एक तरफ 6 महीने का मिला एक्सटेंशन,दूसरी तरफ विदाई समारोह!क्या है कुलपति दीवान सिंह रावत की विदाई का राज!

Nainital: On one hand, he got a 6-month extension, on the other hand, there was a farewell ceremony! What is the secret behind the farewell of Vice Chancellor Diwan Singh Rawat?

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय इन दिनों अपनी उपलब्धियों से ज्यादा सवालों और विवादों को लेकर चर्चा में है। एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उपलब्धियों और बेहतर व्यवस्थाओं के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छात्र परीक्षा परिणाम, इंटरनल मार्क्स और विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। अब इसी बीच विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक कार्यालय सूचना ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

 


30 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय सूचना में कहा गया है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत के सम्मान में 31 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे नैनीताल के द हार्मिटेज परिसर में विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि राजभवन द्वारा 17 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार प्रो. रावत का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ाया गया था। आधिकारिक आदेश में साफ कहा गया था कि यह विस्तार 21 जुलाई 2026 से छह महीने अथवा नियमित कुलपति की नियुक्ति तक, जो भी पहले हो, रहेगा।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब कुलपति को छह महीने का सेवा विस्तार मिल चुका है तो फिर 31 अगस्त को विदाई समारोह क्यों? क्या कुलपति सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग से डर गए? क्योंकि शनिवार को जिस तरह छात्रों ने देर शाम यूनिवर्सिटी में बारिश में ही धरना प्रदर्शन किया और चर्चाए रही कि सोमवार को भी छात्र संगठन धरना प्रदर्शन करेगा, ऐसे में कुलपति का इन सब से बचकर विदाई लेकर जाना अपने आप में बड़ा सवाल है ,चर्चाएं ये भी है कि सोमवार को छात्रों द्वारा उन मुद्दों पर मांग भी की जा सकती है जिन मामलों में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर आरोप लगाए गए, उनमें पारदर्शिता के लिए CCTV फुटेज सामने क्यों नहीं रखे गए? छात्राओं और विद्यार्थियों की शिकायतों, इंटरनल मार्क्स समय पर अपडेट न होने, परीक्षा परिणाम में देरी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं।
परीक्षा परिणाम घोषित करने की मांग को लेकर छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन में धरने पर बैठना पड़ा, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने वार्ता कर स्नातक द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम तीन कार्यदिवस में जारी करने का निर्णय लिया। यानी एक तरफ उपलब्धियों की तस्वीर और दूसरी तरफ रिजल्ट के लिए धरना देते विद्यार्थी।

कुछ समय पहले कुलपति की ओर से विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाई गईं। राज्यपाल के साथ मई में हुई समीक्षा बैठक में भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, शोध, नवाचार, डिजिटल व्यवस्थाओं और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों की जानकारी दी गई थी। किसी विश्वविद्यालय की असली उपलब्धि प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताए गए आंकड़े हैं या फिर वह व्यवस्था है जिसमें किसी छात्र को अपने इंटरनल मार्क्स के लिए अधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़ें, रिजल्ट के लिए धरने पर न बैठना पड़े और अपनी शिकायत के समाधान के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल तक न जाना पड़े? विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि सवाल सिर्फ एक विदाई समारोह का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही का है।