Aug 30, 2026 Login

नैनीतालः उपलब्धियों के दावों के बीच कुमाऊं विवि की जमीनी हक़ीकत! रिजल्ट के लिए छात्रों को देर शाम बैठना पड़ा धरने पर, यूनिवर्सिटी ने तीन कार्यदिवस में रिजल्ट जारी करने का दिया भरोसा

Nainital: The ground reality at Kumaun University amidst claims of achievement! Students had to stage a sit-in protest late in the evening over results; the university assured them that the results w

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हाल में अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्थाओं और सुधारों की तस्वीर पेश की गई थी, लेकिन दूसरी ओर विश्वविद्यालय परिसर से सामने आ रही घटनाएं व्यवस्थाओं को लेकर अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। कभी इंटरनल मार्क्स समय पर अपडेट नहीं होने का मामला सामने आता है, तो कभी परीक्षा परिणाम में देरी को लेकर विद्यार्थियों को आंदोलन और धरने का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। हाल ही में विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर एक छात्रा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप भी चर्चा में रहे। छात्रा का आरोप था कि उसके विभाग द्वारा इंटरनल मार्क्स विश्वविद्यालय को कई बार भेजे जाने के बावजूद उसके अंक समय पर अपडेट नहीं किए गए। छात्रा ने मामले की शिकायत कुलपति से की तो आरोप है कि उसे सहयोग मिलने के बजाय कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। छात्रा के अनुसार, इस दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे पैनिक अटैक तक आया, लेकिन उसे तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। बाद में छात्रा ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की, जिसके बाद उसके इंटरनल मार्क्स अपडेट किए गए।

इन घटनाओं के बीच अब स्नातक द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों में देरी का मामला भी सामने आया है। परिणाम घोषित नहीं होने से नाराज कुछ विद्यार्थी 29 अगस्त की शाम करीब छह बजे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए।
मामला बढ़ने के बाद 30 अगस्त को विश्वविद्यालय प्रशासन, विभिन्न संकायों के अधिकारियों, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, कुलानुशासक, उप परीक्षा नियंत्रक और विद्यार्थियों के बीच वार्ता हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम तीन कार्यदिवस के भीतर घोषित करने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय ने यह भी माना कि कुछ विद्यार्थियों के आंतरिक एवं प्रायोगिक मूल्यांकन के अंक छूटे हुए हैं। ऐसे विद्यार्थियों की आवश्यक परीक्षा संबंधित परिसरों और संबद्ध महाविद्यालयों के माध्यम से निर्धारित समयावधि में आयोजित कराने और उनके अंक विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए निर्धारित समयावधि के भीतर विलंब शुल्क के साथ परीक्षा आयोजित कराने की बात भी प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है।

सवाल सिर्फ रिजल्ट का नहीं, व्यवस्था पर भी है

कुमाऊं विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी परीक्षा परिणामों से संबंधित सूचनाएं जारी होती रही हैं, जबकि हालिया रिपोर्टों में परीक्षाफल में देरी के कारण विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रिया में परेशानी होने की बात सामने आई है।  यदि विश्वविद्यालय की व्यवस्थाएं इतनी सुचारु हैं तो छात्रों को अपने परीक्षा परिणाम के लिए प्रशासनिक भवन में धरने पर क्यों बैठना पड़ रहा है? इंटरनल और प्रायोगिक अंक समय पर अपडेट क्यों नहीं हो पाते? विद्यार्थियों को अपनी छोटी-छोटी शैक्षणिक समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार अधिकारियों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं? सबसे महत्वपूर्ण सवाल है क्या विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का आकलन केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और कागजी दावों से होना चाहिए या फिर विद्यार्थियों को मिलने वाली वास्तविक सुविधाओं और समस्याओं के समाधान से? अब विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ तीन कार्यदिवस में परिणाम घोषित करने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की भी है जिसमें विद्यार्थियों को अपने अधिकारों और शैक्षणिक समस्याओं के लिए धरना-प्रदर्शन करने की जरूरत ही न पड़े।