नैनीताल:VC के प्रेस नोट पर छात्रा का पलटवार!उपाधि तो मिली नहीं तो प्रेस नोट में दावा क्यों?अंकों की लड़ाई में अब बहन को भी किया गया टारगेट!चुनिंदा मीडिया की भूमिका पर भी खड़े किए सवाल
नैनीताल। कुमाऊं यूनिवर्सिटी में पूर्व छात्रा के अंकों और कुलपति कार्यालय में 13 जुलाई को हुई कथित घटना को लेकर जारी विवाद के बीच अब पीड़ित छात्रा ने विश्वविद्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट पर अपना बयान जारी किया है। छात्रा ने विश्वविद्यालय के “मानवीय दृष्टिकोण” के दावे से लेकर CCTV फुटेज, अंक अपडेट करने की प्रक्रिया, उपाधि मिलने के दावे और चुनिंदा मीडिया संस्थानों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
पीड़ित छात्रा ने कहा कि वीसी सीसीटीवी फुटेज की बात नहीं करना चाहते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने बैठा मीडिया का एक समूह ये पूछने की जहमत भी नहीं उठाता कि यदि उस दिन कुछ हुआ ही नहीं था तो सीसीटीवी फुटेज मीडिया को उपलब्ध करवा दीजिए या स्वयं जारी कर दीजिए।
छात्रा ने अंकों से जुड़े मामले पर कहा कि नम्बरों का रिकॉर्ड रखना यूनिवर्सिटी का दायित्व है और नम्बर भेजना विभाग का। विभाग तभी असाइनमेंट स्वीकार करता है जब उसकी तय अवधि होती है, अन्यथा विभाग असाइनमेंट नहीं लेता और अगर लेता है तो ₹500 की फीस लेकर पुनः असाइनमेंट जमा करना होता है, यह मुझे भी पता है। तय समय सीमा से पहले ही असाइनमेंट जमा हुआ, विभाग द्वारा नंबर भेजे गए, यूनिवर्सिटी द्वारा तीन दिन के लिए पोर्टल खोला गया, फिर 28 अप्रैल से 3 दिन के कार्यकाल में डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर क्या कर रहे थे?
छात्रा ने विश्वविद्यालय के प्रेस नोट में अपनी उपाधि मिलने संबंधी दावे पर भी सवाल उठाया। उसने कहा कि “यूनिवर्सिटी ने उपाधि अभी तक नहीं दी है, फिर वीसी उपाधि प्राप्ति का झूठ क्यों बोल रहे हैं? प्रेस नोट में बोला है कि उपाधि भी उसको मिल गई है। उपाधि यूनिवर्सिटी ने भेज दी होगी, हमें नहीं पता, क्योंकि हमें तो अभी तक रिसीव ही नहीं हुई है।
पीड़िता ने मीडिया कवरेज को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “वीसी का सीसीटीवी फुटेज पर बात न करना, बात न करना, वहीं कुछ चुनिंदा पत्रकार, जिनका विश्वविद्यालय से निजी हित है, उनको ही क्यों बुलाया जाता है? जैसे दैनिक जागरण व हिंदुस्तान।”
छात्रा ने आगे कहा कि उसे और उसके परिवार को वीसी तथा उनके कुछ पक्षकारों की ओर से "बाहर का” बताया गया, जबकि उसके अनुसार उसका परिवार उत्तराखंड का मूल निवासी है। छात्रा ने कहा कि “परिवार के 6 में से 4 सदस्य कुमाऊं यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं। यदि छात्रा बाहरी है, तो इस हिसाब से वीसी भी बाहरी ही हैं।
पीड़िता ने अपनी छोटी बहन से जुड़े अंकों के मामले का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि “नंबरों का खेल उसकी छोटी बहन के साथ भी हुआ था, जिसमें गलती विभाग स्तर पर प्रोफेसर की थी। उसके बाद छात्रा को 2 सेमेस्टर में नंबर देने हेतु टारगेट किया गया था। जिसके साक्ष्य भी मौजूद हैं।”
छात्रा के इन आरोपों के बाद अब विवाद में एक बार फिर CCTV फुटेज और विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड की पारदर्शिता का मुद्दा केंद्र में आ गया है।
अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय छात्रा द्वारा उठाए गए इन नए सवालों पर क्या जवाब देता है।