खाकी का त्वरित एक्शन:रुपयों के विवाद में दोस्त ने ही मारी थी हरदीप को गोली, 48 घंटे में हत्याकांड का पर्दाफाश,कातिल दंपत्ति गिरफ्तार
रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर क्षेत्र में पिछले दिनों हुए बहुचर्चित और सनसनीखेज हरदीप सिंह हत्याकांड का पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर सफल अनावरण कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के कुशल नेतृत्व और कुंडा थाना पुलिस के सटीक फॉरेंसिक व सर्विलांस नेटवर्क के चलते हत्या में शामिल पति-पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी पिस्टल, खोखा कारतूस और घटना में प्रयुक्त कार भी पुलिस ने बरामद कर ली है।
काशीपुर में हरदीप सिंह हत्याकांड का पुलिस ने महज 48 घंटे में सनसनीखेज खुलासा कर दिया। पुलिस के अनुसार हत्या के पीछे रुपयों के लेन-देन को लेकर चल रहा विवाद सामने आया है। मामले में पुलिस ने पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त लाइसेंसी पिस्टल, खोखा कारतूस और कार भी बरामद की गई है। जांच में हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने और नष्ट करने की साजिश में आरोपी महिला की भूमिका भी सामने आई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधम सिंह नगर अजय गणपति के निर्देशन में कुण्डा पुलिस ने इस मामले की जांच को तेजी से आगे बढ़ाया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तत्काल अलग-अलग टीमों का गठन किया। टीमों ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में गहन छानबीन करने के साथ संदिग्ध लोगों से पूछताछ की और वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों को जुटाकर उनका विश्लेषण किया। लगातार किए गए प्रयासों के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर 2026 को वादिनी रजविन्दर कौर पत्नी सुखदेव सिंह, निवासी गुलजारपुर, ने थाना कोतवाली काशीपुर में सूचना दी कि उनके पुत्र हरदीप सिंह पुत्र सुखदेव सिंह, निवासी गुलजारपुर कुण्डेश्वरी, की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संदीप सिंह ने अपनी पत्नी और मां के सामने हरदीप सिंह को गोली मारी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने तत्काल मामले की जांच शुरू की और हत्या के कारणों की पड़ताल की। शुरुआती जांच में रुपयों के लेन-देन को लेकर विवाद की बात सामने आई। पुलिस जांच में केवल गोली चलाने वाले आरोपी तक मामला सीमित नहीं रहा। जांच के दौरान हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने और नष्ट करने के कथित षडयंत्र में संदीप कौर की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 274/2026 के तहत धारा 103(1), 238, 61(2) बीएनएस तथा 30 आर्म्स एक्ट में कार्रवाई की है। बरामद लाइसेंसी पिस्टल और खोखे को भी विवेचना में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के साथ तकनीकी और वैज्ञानिक जांच का सहारा लिया। घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरागरसी-पतारसी के साथ संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस टीमों ने उपलब्ध साक्ष्यों को आपस में जोड़ते हुए घटनाक्रम की कड़ियां खंगालीं। लगातार की गई जांच के परिणामस्वरूप दोनों आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरे मामले में पुलिस की सबसे बड़ी उपलब्धि महज 48 घंटे में हत्याकांड का खुलासा और दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी मानी जा रही है। एसएसपी अजय गणपति के निर्देश पर गठित टीमों ने घटनास्थल की जांच से लेकर तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण तक तेजी से कार्रवाई की। पुलिस अब हत्या के पीछे रुपयों के विवाद की वास्तविक प्रकृति, साजिश में दोनों आरोपियों की भूमिका और वारदात के बाद साक्ष्य मिटाने के प्रयास से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। बरामद हथियार, खोखा और कार को विवेचना में शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।