उत्तराखण्ड में हैरान करने वाला मामलाः गंदगी से भरी मशीनों में तैयार हो रहा था बच्चों का पसंदीदा सॉस! छापेमारी में खुली पोल, अंदर का नजारा देख अधिकारी भी रह गए हक्के-बक्के

Shocking case in Uttarakhand: Children's favorite sauce was being prepared in filth-ridden machines! A raid exposed the reality, and officials were left stunned by the scene inside.

रुड़की। अगर आप भी अपने बच्चों को बाजार में मिलने वाली पैकेटबंद या बोतलबंद सॉस खिलाते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हरिद्वार जिले के रुड़की में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी के दौरान सॉस निर्माण को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग की टीम ने एक ऐसी इकाई पर कार्रवाई की, जहां कथित तौर पर बेहद अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ परिस्थितियों में सॉस का निर्माण किया जा रहा था। जांच के दौरान सॉस बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनों में भारी गंदगी मिली, जबकि फैक्ट्री की दीवारों और फर्श पर भी गंदगी जमी हुई थी। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए मौके से करीब 8 कुंतल तैयार सॉस बरामद किया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 32 हजार रुपये बताई गई है। |

खाद्य सुरक्षा मानकों और आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आने के बाद इस पूरे स्टॉक को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। इसके अलावा फैक्ट्री से बिना लेबल की वेजिटेबल सॉस की 351 बोतलें भी बरामद की गईं, जिन्हें विभाग की टीम ने मौके पर सीज कर दिया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कांवड़ मेला शुरू होने से एक दिन पहले की गई। हरिद्वार जिले में कांवड़ मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और यात्रियों के पहुंचने को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। इसी बीच विभाग को बाजारों में बिना लेबल वाली सॉस की बोतलों की बिक्री और खाद्य पदार्थों के मानकों के अनुरूप नहीं होने की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों और प्राप्त सूचनाओं के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने रुड़की के मतलबपुर गांव स्थित एक कंपनी में छापेमारी की।

वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन और पवन कुमार की टीम ने मौके पर पहुंचकर इकाई का निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम को बड़ी संख्या में बिना लेबल की वेजिटेबल सॉस की बोतलें मिलीं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन बोतलों पर खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विवरण दर्ज नहीं थे। नियमों के मुताबिक पैक किए गए खाद्य उत्पादों पर उपभोक्ताओं के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध होना आवश्यक है, लेकिन बरामद बोतलों पर कई अहम जानकारियां गायब थीं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि सॉस की बोतलों पर बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि, निर्माता का नाम और पता, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और इस्तेमाल किए गए सामग्री यानी इंग्रीडिएंट्स की सूची जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां अंकित नहीं थीं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह पता लगाना मुश्किल था कि सॉस कब तैयार किया गया, इसकी वैधता कितने समय तक है और इसे बनाने में किन-किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके से बिना लेबल वाली 351 बोतलों को सीज कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया था। ऐसे में इन उत्पादों को बाजार में बिक्री के लिए भेजे जाने से पहले ही कार्रवाई कर दी गई।

छापेमारी के दौरान सिर्फ लेबलिंग में ही अनियमितता नहीं मिली, बल्कि सॉस निर्माण की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। निरीक्षण में पाया गया कि सॉस का निर्माण बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था। सॉस तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीनों में अत्यधिक गंदगी पाई गई। इसके साथ ही फैक्ट्री की दीवारों और फर्श पर भी गंदगी जमा थी। खाद्य पदार्थों के निर्माण के लिए साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं किए जाने पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान मौके पर निर्मित वेजिटेबल सॉस सहित कुल दो नमूने लिए गए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया है। अब प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद उत्पाद की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल किए गए खाद्य पदार्थों की स्थिति को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान फैक्ट्री संचालक की ओर से कई आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर पानी की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा वहां काम करने वाले कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत नहीं किए गए। सॉस की पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही प्लास्टिक बोतलों के फूड ग्रेड सर्टिफिकेट से संबंधित दस्तावेज भी टीम के सामने नहीं रखे गए। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन सभी अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की। लेबलिंग प्रावधानों का उल्लंघन, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने और अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ का निर्माण किए जाने के कारण फैक्ट्री में तैयार और स्टॉक किए गए करीब 8 कुंतल सॉस को मौके पर ही नष्ट कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, नष्ट किए गए सॉस की अनुमानित कीमत करीब 32 हजार रुपये है। विभाग ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए फैक्ट्री में सॉस और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण, संग्रहण और बिक्री पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। इसके लिए फैक्ट्री के गेट पर नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है। विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब संबंधित इकाई में खाद्य पदार्थों के निर्माण और बिक्री को लेकर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।