पूर्वी भारत में अभेद्य होगी सुरक्षा: बंगाल-असम सीमा पर 450KM की नई बाड़बंदी, रडार पर घुसपैठिये और कट्टरपंथी नेटवर्क
नई दिल्ली। पूर्वी भारत की सुरक्षा व्यवस्था में एक युगांतकारी परिवर्तन की शुरुआत हो गई है। केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सुरक्षा का एक ऐसा नया खाका तैयार किया है, जिसका उद्देश्य घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार से संचालित होने वाले कट्टरपंथी मॉड्यूल को जड़ से खत्म करना है। पश्चिम बंगाल और असम में अब समान राजनीतिक नेतृत्व होने के कारण केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की बाधाएं दूर हो गई हैं, जिससे वर्षों से लंबित सुरक्षा परियोजनाएं अब 'फास्ट ट्रैक' पर आ गई हैं। इस नई सुरक्षा रणनीति का सबसे अहम हिस्सा पश्चिम बंगाल से लगती बांग्लादेश की सीमा का वह 450 किलोमीटर लंबा हिस्सा है, जो अब तक खुला पड़ा था। बंगाल की नई सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) को बाड़बंदी के लिए जमीन देने की ऐतिहासिक घोषणा कर दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, जमीन हस्तांतरण की यह प्रक्रिया अगले 45 दिनों में पूरी कर ली जाएगी।
इस सीमा पर न केवल कटीले तारों की बाड़ (फेंसिंग) लगेगी, बल्कि हाई-टेक पिलर और आधुनिक फ्लड लाइटें भी स्थापित की जाएंगी। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 11 वर्षों में इस सीमा से लगभग 21,000 घुसपैठियों को पकड़ा गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने पहले भी संकेत दिया था कि पूर्ववर्ती सरकार को 10 बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिससे यह काम रुका हुआ था। सीमा की निगरानी को मानवीय और तकनीकी रूप से अभेद्य बनाने के लिए हर 30 किलोमीटर पर एक बटालियन हेडक्वार्टर बनाने की योजना है। प्रत्येक हेडक्वार्टर में लगभग 1,000 जवान तैनात रहेंगे। 450 किमी की सीमा को कवर करने के लिए 300-400 एकड़ क्षेत्र में बीएसएफ के 15 बटालियन हेडक्वार्टर और सेक्टर हेडक्वार्टर तैयार किए जाएंगे। इस विस्तार से बीएसएफ में हजारों नए पदों के सृजन और पदोन्नति के रास्ते भी खुलेंगे। पूर्व अधिकारियों का मानना है कि 39 रिजर्व बटालियन की मांग पूरी होने से चुनाव ड्यूटी के दौरान बॉर्डर की सुरक्षा से समझौता नहीं करना पड़ेगा। सुरक्षा एजेंसियों ने घुसपैठ और कट्टरपंथ के लिहाज से कुछ जिलों को 'रेड जोन' में रखा है। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर धुबरी, करीमगंज, दक्षिण सालमारा और बरपेटा इन इलाकों में संयुक्त इंटेलिजेंस ग्रिड और ड्रोन निगरानी के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। विशेष रूप से उन गिरोहों पर शिकंजा कसा जाएगा जो फर्जी पहचान पत्र बनाने और हवाला नेटवर्क के जरिए आतंकी मॉड्यूल को फंडिंग करने में शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आने वाले महीनों में पुराने संदिग्ध मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा सकती हैं। जमीनी बाड़बंदी के साथ-साथ नदी क्षेत्रों में 'फ्लोटिंग पैट्रोलिंग' (तैरती हुई चौकियां) बढ़ाई जाएंगी। स्मार्ट फेंसिंग तकनीक के जरिए सेंसर आधारित निगरानी की जाएगी, जिससे अंधेरे या खराब मौसम में भी घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया जा सके। गृह मंत्रालय का यह ब्लूप्रिंट न केवल भारत की सीमाओं को सुरक्षित करेगा, बल्कि आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बने कट्टरपंथी डिजिटल मॉड्यूल पर भी निर्णायक प्रहार करेगा।