खुल गई प्रकृति की जन्नतः पर्यटकों के लिए खुले ‘फूलों की घाटी’ के द्वार! रंग-बिरंगे फूलों की दुनिया करेगी मंत्रमुग्ध

Nature's paradise has opened: The Valley of Flowers opens its doors to tourists! A world of colorful flowers will mesmerize you.

चमोली। हिमालय की गोद में बसी प्रकृति की अनुपम धरोहर और विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (वैली ऑफ फ्लावर्स) पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। घाटी के खुलते ही देश-विदेश से आने वाले प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स और फोटोग्राफरों में उत्साह का माहौल है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह अद्भुत घाटी हर वर्ष लाखों पर्यटकों को अपनी प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ पुष्प संपदा से आकर्षित करती है। चमोली जिले में स्थित यह घाटी जून से अक्टूबर तक प्रकृति के रंगों से सराबोर रहती है। मानसून के आगमन के साथ यहां सैकड़ों प्रजातियों के फूल खिलने लगते हैं, जो जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान अपने चरम पर पहुंच जाते हैं। इस दौरान पूरी घाटी मानो रंग-बिरंगे फूलों की चादर ओढ़ लेती है और पर्यटकों को स्वर्ग जैसी अनुभूति कराती है।

500 से अधिक प्रजातियों के फूलों का बसेरा
फूलों की घाटी अपनी जैव विविधता और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां लगभग 500 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के फूल पाए जाते हैं। इनमें ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता (ब्लू पॉपी), कोबरा लिली, प्रिमुला, एनिमोन, जेरैनियम और अनेक औषधीय पौधे शामिल हैं। घाटी में खिलने वाले फूलों के अलग-अलग रंग और आकार पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई और अगस्त का महीना फूलों की घाटी भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, जब घाटी अपने पूर्ण यौवन पर होती है और दूर-दूर तक रंगों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।

रोमांच से भरपूर है घाटी तक का सफर
फूलों की घाटी तक पहुंचना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है। पर्यटकों को सबसे पहले गोविंदघाट पहुंचना पड़ता है। यहां से लगभग 13 किलोमीटर का ट्रेक कर घांघरिया पहुंचा जाता है। घांघरिया से घाटी का प्रवेश द्वार करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित है। घाटी के भीतर पर्यटकों को केवल दिन के समय भ्रमण की अनुमति होती है। सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर सूर्यास्त से पहले सभी पर्यटकों को वापस लौटना अनिवार्य होता है। प्रशासन और वन विभाग द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। समुद्र तल से लगभग 12,995 फीट की ऊंचाई पर स्थित फूलों की घाटी करीब 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। यह क्षेत्र नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है और अपनी अद्वितीय पारिस्थितिकी के कारण वैश्विक स्तर पर पहचान रखता है। घाटी में दुर्लभ वन्यजीव, रंग-बिरंगी तितलियां, औषधीय जड़ी-बूटियां, प्राकृतिक झरने और बर्फ से ढके पर्वत इसकी सुंदरता को और भी आकर्षक बनाते हैं। रतवान ग्लेशियर से निकलने वाली पुष्पावती नदी घाटी के बीचों-बीच बहती है, जो इस प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगाने का काम करती है।