झारखंड में 'लाल आतंक' की टूटी कमर: एक करोड़ का इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार,चार राज्यों के नक्सली नेटवर्क पर सुरक्षा बलों का बड़ा प्रहार
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। एक करोड़ रुपये के इनामी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के शीर्ष कमांडर मिसिर बेसरा को मंगलवार शाम धनबाद-गिरिडीह सीमावर्ती क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके साथ दो सक्रिय माओवादी सदस्य मोछू और सौरभ उर्फ गौरव भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं, जबकि दो स्थानीय ग्रामीणों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका मान रही हैं। वह लंबे समय से केंद्र और कई राज्य सरकारों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था और उस पर कुल एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। लगभग चार दशक से माओवादी संगठन से जुड़ा बेसरा संगठन की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो का अहम सदस्य रहा है तथा नीतिगत फैसलों और रणनीति निर्माण में उसकी प्रमुख भूमिका मानी जाती रही है। गिरिडीह जिले के हरलाडीह गांव का रहने वाला मिसिर बेसरा झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में फैले माओवादी नेटवर्क का प्रमुख संचालक था। कोल्हान, सारंडा और पारसनाथ के दुर्गम जंगलों में उसका गहरा प्रभाव था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह संगठन के कैडरों को संगठित करने, हथियारों की आपूर्ति, लेवी वसूली और विभिन्न राज्यों में हमलों की रणनीति तैयार करने का काम करता था। मिसिर बेसरा पर हत्या, पुलिस और सुरक्षा बलों पर घातक हमले, आईईडी विस्फोट, रंगदारी वसूली तथा कई अन्य गंभीर आपराधिक मामलों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। लंबे समय से उसकी तलाश में सुरक्षा एजेंसियां अभियान चला रही थीं। हाल के महीनों में उसके कई करीबी सहयोगियों के आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी के बाद उसका नेटवर्क लगातार कमजोर पड़ता गया। इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए सुरक्षा बलों ने सटीक सूचना के आधार पर घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा से पूछताछ में माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व, हथियारों की सप्लाई चेन, लेवी वसूली के नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और विभिन्न राज्यों में सक्रिय कैडरों के बारे में कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं। इसके साथ पकड़े गए दो स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है कि उनका संबंध माओवादी गतिविधियों से किस स्तर तक था। गौरतलब है कि इसी दिन झारखंड पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली, जब 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें छह नक्सलियों पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था। 128 मामलों में आरोपी और 15 लाख रुपये के इनामी संतोष महतो उर्फ बासुदेव दा भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल है। एक ही दिन में शीर्ष कमांडर की गिरफ्तारी और बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर ने झारखंड में माओवादी संगठन की कमजोर होती पकड़ को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि माओवादी संगठन की रणनीतिक और संचालन क्षमता पर बड़ा प्रहार है। यदि पूछताछ में महत्वपूर्ण सूचनाएं सामने आती हैं, तो आने वाले समय में झारखंड समेत बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय नक्सली नेटवर्क पर सुरक्षा बल और भी प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर है और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।