चौंकाने वाला मामलाः चार दिन पहले जिसका किया था अंतिम संस्कार! शांति पाठ के दिन वही शख्स लौट आया घर, परिवार और ग्रामीणों के उड़े होश
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और ग्रामीणों को भी हैरानी में डाल दिया है। यहां अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के सैदपुर अड्डा गांव में जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वही शख्स कुछ दिन बाद अचानक जिंदा अपने घर पहुंच गया। बताया जाता है कि जब वह घर पहुंचा, उस समय उसके परिवार में उसकी आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ चल रहा था। सामने जिंदा खड़े व्यक्ति को देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए और पूरे गांव में यह मामला चर्चा का विषय बन गया। जानकारी के अनुसार, सैदपुर अड्डा निवासी कमल सिंह रैदास करीब डेढ़ साल से अपने घर से बाहर रह रहा था। बताया जा रहा है कि वह पहले पंजाब में नौकरी करने गया था। इसके बाद उसने ट्रक पर हेल्पर के रूप में काम किया और बाद में काम की तलाश में ग्वालियर चला गया, जहां वह प्लंबर का काम कर रहा था। लंबे समय से घर से दूर रहने के कारण परिवार के लोगों का उससे नियमित संपर्क नहीं था। इसी बीच 18 जुलाई को अजीतमल कोतवाली क्षेत्र में नेशनल हाईवे के किनारे एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ। शव की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद 20 जुलाई को कमल सिंह के भाई दशरथ सिंह ने शव की पहचान अपने छोटे भाई के रूप में कर दी। परिजनों की ओर से की गई पहचान के आधार पर पुलिस ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद 21 जुलाई को परिजनों ने मृत समझे गए व्यक्ति का अंतिम संस्कार भी कर दिया। परिवार को यकीन था कि कमल अब इस दुनिया में नहीं है। घर में शोक का माहौल था और परिजन अंतिम संस्कार के बाद की रस्मों में जुटे हुए थे। लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आया, जब कमल की पत्नी सुनीता को उसके जिंदा होने की जानकारी थी। इसके बाद सुनीता ने उस मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, जिससे कमल पहले बातचीत करता था। फोन पर संपर्क होने के बाद जब उसकी बात ग्वालियर में मौजूद कमल से हुई तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे विश्वास हो गया कि जिस व्यक्ति को परिवार मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर चुका है, वह कमल नहीं था। इसके बाद सुनीता ने कमल से तुरंत घर लौटने को कहा। कमल सिंह भी ग्वालियर से अपने गांव सैदपुर अड्डा पहुंच गया। लेकिन जब वह घर पहुंचा तो वहां का नजारा देखकर वह भी हैरान रह गया। जिस घर में उसका परिवार उसे मृत मानकर शोक मना रहा था, उसी घर में उसकी आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ चल रहा था।
कमल को अचानक अपने सामने जिंदा खड़ा देखकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए। कुछ देर तक किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर यह सब हुआ क्या है। जिस व्यक्ति की मौत पर परिवार अंतिम संस्कार तक कर चुका था, वह व्यक्ति उनके सामने जिंदा खड़ा था। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग कमल को देखने के लिए पहुंचने लगे। मामले की जानकारी मिलने के बाद 25 जुलाई को कमल की पत्नी सुनीता ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 18 जुलाई को नेशनल हाईवे के किनारे जो शव मिला था, आखिर वह किस व्यक्ति का था और उसकी पहचान कमल सिंह के रूप में कैसे हो गई। पुलिस क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार के अनुसार, 18 जुलाई को बरामद हुए अज्ञात शव की पहचान दशरथ सिंह ने अपने भाई कमल सिंह के रूप में की थी। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। लेकिन 25 जुलाई को कमल की पत्नी ने उसके जिंदा होने की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस अब पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस के सामने अब कई सवाल खड़े हो गए हैं। जिस शव की पहचान कमल सिंह के रूप में की गई, वह वास्तव में किसका था? शव की पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या पहचान करने में किसी तरह की गलतफहमी हुई या फिर कोई अन्य कारण था? पुलिस अब इन सभी सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है। फिलहाल, पुलिस उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिसका अंतिम संस्कार कमल सिंह के परिजनों ने किया था। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शव की पहचान की प्रक्रिया में किन परिस्थितियों में गलती हुई। यह पूरा मामला सामने आने के बाद गांव में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।