उत्तराखंड में बारिश का रौद्र रूप: अलकनंदा-मंदाकिनी चेतावनी स्तर से ऊपर, केदारनाथ यात्रा पर ब्रेक

Torrential rains wreak havoc in Uttarakhand: Alaknanda and Mandakini rivers above warning levels; Kedarnath Yatra halted.

उत्तराखंड में आफत की बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियाँ उफान पर हैं और दोनों का जलस्तर चेतावनी (वार्निंग) स्तर को पार कर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुँच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन श्रीकेदारनाथ धाम यात्रा को आंशिक रूप से रोक दिया है, वहीं नदी तटीय इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की बुधवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार, अलकनंदा नदी का जलस्तर सुबह 7 बजे 626.80 मीटर दर्ज किया गया, जो 626.00 मीटर के चेतावनी स्तर से ऊपर और 627.00 मीटर के खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुका है। वहीं मंदाकिनी नदी का जलस्तर 625.50 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो 625.00 मीटर के चेतावनी स्तर से ऊपर बह रहा है। हालांकि गंगानगर और गौरीकुंड क्षेत्रों में नदी का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बना हुआ है। पिछले 24 घंटों में जिले में लगातार बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा ऊखीमठ तहसील में 37.50 मिमी रिकॉर्ड की गई, जबकि रुद्रप्रयाग में 10.00 मिमी और जखोली में 12.00 मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में अभी भी वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों द्वारा लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों से नदी तटों से दूर रहने तथा अनावश्यक रूप से नदी के पास न जाने की अपील की जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। भारी बारिश का असर सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। एनएच-107 सिल्ली के पास मलबा आने से अवरुद्ध हो गया है, जिसके चलते श्रीकेदारनाथ यात्रा को एहतियातन आंशिक रूप से रोक दिया गया है। इसके अलावा जिले में एक राष्ट्रीय राजमार्ग, सात राज्य मार्ग, चार लोक निर्माण विभाग के मार्ग, चार पीएमजीएसवाई सड़कें तथा एक एनपीसीसी मार्ग भी विभिन्न स्थानों पर प्रभावित हैं। सड़कें बंद होने से यात्रियों और स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने सभी विभागों को किसी भी संभावित प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहने और राहत एवं बचाव संसाधनों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी आपदा, भूस्खलन, दुर्घटना या मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना तत्काल जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को दें। लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों से मौसम की चेतावनियों का पालन करने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है, ताकि किसी भी संभावित हादसे से बचा जा सके।