यूपी के इनामी गैंगस्टर भदौरिया की गिरफ्तारी पर उठे सवाल! गले नहीं उतर रही पुलिस की कहानी, करोड़ों की डील और सफेदपोशों की भूमिका की चर्चाएं तेज

Questions raised over the arrest of UP gangster Bhadauria, who carried a reward on his head! The police's version of events fails to convince; speculation intensifies regarding a multi-crore deal and

रुद्रपुर। 45 से अधिक मुकदमों में वांछित और यूपी के इनामी गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया की उत्तराखंड के काशीपुर से हुई गिरफ्तारी सवालों के घेरे में आ गई है। गैंगस्टर की गिरफ्तारी के बाद ऊधम सिंह नगर पुलिस ने इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया था, लेकिन अब घटनाक्रम और उससे जुड़े तथ्यों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया के खिलाफ उत्तर प्रदेश में हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट सहित करीब 46 संगीन मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार वह लंबे समय से यूपी एसटीएफ के रडार पर था और उसकी तलाश की जा रही थी। ऐसे में 8 जुलाई 2026 को काशीपुर की आईटीआई कोतवाली पुलिस द्वारा उसे एक तमंचे और तीन जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किए जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया में तैर रही खबरों के अनुसार कोतवाल विक्रम राठौर, ब्लॉक प्रमुख पति विजय कुमार और कुछ सफेदपोश नेताओं की कथित मौजूदगी में गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया को यूपी एसटीएफ की कार्यवाही से बचाने के लिए करोड़ों रूपए की डील हुई थी और जब यह बात खुली तो एसएसपी ऊधम सिंह नगर ने तत्काल प्रभाव से विक्रम राठौर को लाइन हाजिर कर दिया। इधर सांसद अजय भट्ट ने ब्लाक प्रमुख पति विजय कुमार को सांसद प्रतिनिधि के पद से हटा दिया है, जिसकी सूचना जिलाधिकारी उधम सिंह नगर को प्रेसित की गई है। जैसा कि बताया जाता है गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया लावलश्कर के साथ लग्जरी गाड़ियों में ऑटोमेटिक हथियारों के साथ घूमता है, लेकिन आईटीआई कोतवाली पुलिस ने उसे पैदल घूमते हुए मात्र एक तमंचे, तीन जिन्दा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि इतने गंभीर आपराधिक इतिहास वाले अपराधी को केवल एक तमंचे की बरामदगी दिखाकर जेल भेजने की पूरी कार्रवाई क्या वास्तव में सामान्य पुलिस कार्रवाई थी? सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों ने उत्तराखण्ड पुलिस की छवि पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। वहीं सोशल मीडिया पर एक तबका ऐसा भी है जो कोतवाल विक्रम राठौर और अन्य लोगों को क्लीन चिट दे रहा है। हांलाकि सच्चाई क्या है ये तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा। फिलहाल पुलिस और शासन ने इस मामले में जांच का हवाला देकर चुप्पी साध रखी है। हांलाकि आवाज इंडिया सोशल मीडिया के दावों और आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। 

तो क्या सफेदपोशों की मौजूदगी में हुई करोड़ों की डील? चर्चाओं का बाजार गर्म
मामले में सबसे अधिक चर्चा कथित तौर पर करोड़ों रुपये की डील को लेकर हो रही है। चर्चा है कि गैंगस्टर को बचाने के लिए करोड़ों़ रुपये तक की डील हुई है। यह भी कहा जा रहा है कि मामला देहरादून तक पहुंच चुका है। चर्चा यहां तक है कि गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया को यूपी पुलिस की कार्यवाही से बचाने के लिए काशीपुर के कुछ सफेदपोशों ने पूरी भूमिका निभाई और पुलिस के साथ मिलकर गिरफ्तारी की कहानी बनाई। सोशल मीडिया की खबरों के अनुसार मामले में काशीपुर ब्लॉक प्रमुख पति विजय कुमार के साथ-साथ कुछ सफेदपोशों ने पुलिस के साथ मिलकर बड़ी डील की है। इस बीच सांसद अजय भट्ट ने अपने प्रतिनिधि विजय कुमार को पदमुक्त कर दिया है, हांलाकि सांसद ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उन्हें जानकारी प्राप्त हुई है कि विजय कुमार किसी गैरकानूनी मामले में वांछित हैं, जिसके चलते उन्हें पदमुक्त किया गया है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया पर इसे गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया की गिरफ्तारी के बाद उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है। 

किसी के गले नहीं उतर रही काशीपुर पुलिस की कहानी
आईटीआई कोतवाली पुलिस के अनुसार 8 जुलाई की रात डायल-112 पर सूचना मिली कि चैती मेला मार्ग के पास एक संदिग्ध व्यक्ति घूम रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पुरानी चौकी चैती के निकट स्थित खंडहर के पास घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इसी कहानी पर अब सबसे अधिक सवाल उठ रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सूचना रात 10ः08 बजे प्राप्त हुई, इसके बाद पुलिस टीम 10ः14 बजे रवाना हुई और 10ः30 बजे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जाता है कि इनामी गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया पूरे लाव लश्कर के साथ चलता था और उसके साथ हथियारों से लैस बदमाशों की टीम चलती थी, लेकिन काशीपुर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी को लेकर जो कहानी बताई है वो किसी के गले नहीं उतर रही है। 

सुर्खियों में एसएसपी का एक्शन
शनिवार देर शाम एसएसपी अजय गणपति द्वारा आईटीआई थानाध्यक्ष विक्रम राठौड़ और पैगा चौकी प्रभारी जसविंदर सिंह को लाइन हाजिर किए जाने के बाद चर्चाओं को और बल मिल गया। पुलिस के प्रेस नोट में केवल लापरवाही और दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता का उल्लेख किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को हालिया गैंगस्टर गिरफ्तारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस विभाग ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का संबंध गैंगस्टर योगेश मलिक की गिरफ्तारी से है। ऐसे में इस संबंध में सामने आ रही बातें फिलहाल चर्चाओं और सूत्रों पर आधारित हैं। फिलहाल यूपी के गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया की गिरफ्तारी के बाद यूएस नगर पुलिस सवालों के घेरे में खड़ी है और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें उठ रही हैं।

सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आए विक्रम राठौर के पुराने विवाद
भदौरिया गिरफ्तारी विवाद के बीच आईटीआई कोतवाली प्रभारी रहे विक्रम राठौर का पुराना कार्यकाल भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यूं तो विक्रम राठौर सोशल मीडिया पर अपने वीडियो और रील्स के कारण अक्सर चर्चाओं में रहते हैं, लेकिन मौजूदा विवाद के बीच उनके पुराने कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के  मुताबिक वर्ष 2019 में हल्द्वानी के सिंधी चौक पर व्यापारी भूपेंद्र पांडेय की दिनदहाड़े हत्या के बाद मृतक के परिजनों ने तत्कालीन कोतवाल विक्रम राठौर पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका आरोप था कि हत्या से पहले सुरक्षा की मांग किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और आरोपियों से समझौते का प्रयास किया गया। इसके बाद विक्रम राठौर को स्थानांतरित कर दिया गया था।