उत्तराखंड में सियासी घमासानः भाजपा विधायक का तथाकथित लेटर वायरल! कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा, जानें पूर्व विधायक शुक्ला ने किसे कहा शिशुपाल

Political turmoil in Uttarakhand: A purported letter from a BJP MLA goes viral! Congress attacks the Dhami government; learn who former MLA Shukla referred to as Shishupal.

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक वायरल पत्र को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस मामले में जहां आज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। वहीं किच्छा से पूर्व भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने प्रेस कांफ्रेंस कर पत्र को लेकर अपनी बात रखी और गदरपुर विधायक अरविन्द पाण्डे को शिशुपाल करार दिया। पूर्व विधायक शुक्ला ने कहा कि अरविन्द पाण्डे खुद को पार्टी से बड़ा समझ रहे हैं। कहा कि वह कबतक षड़यंत्र रचेंगे। दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों गदरपुर से भाजपा विधायक अरविंद पांडे के नाम से जुड़ा एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है। इस पत्र में कथित तौर पर मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हांलाकि आवाज इंडिया वायरल पत्र की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। 

 मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि वह लंबे समय से इस विषय को लेकर राज्यपाल से समय मांग रहे थे, लेकिन उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं दिया गया। ऐसे में अब इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया जा रहा है। गणेश गोदियाल ने कहा कि वायरल पत्र में कई गंभीर बातें लिखी गई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि पत्र पर अरविंद पांडे के हस्ताक्षर हैं और यह उनके आधिकारिक लेटर पैड पर लिखा गया है। हालांकि पत्र किसे संबोधित है, यह हिस्सा काले रंग से मिटा दिया गया है, जिससे संदेह और गहरा गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पत्र में यह उल्लेख है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पिछले कई वर्षों से अरविंद पांडे के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पत्र में 13 मार्च 2025 को बाजपुर थाने में दर्ज एक कथित फर्जी मुकदमे और 20 जनवरी 2026 को परिवार के खिलाफ जमीन कब्जाने के आरोप में दर्ज मामले का जिक्र किया गया है, जिन्हें दबाव बनाने की कार्रवाई बताया गया है।

गणेश गोदियाल ने यह भी कहा कि पत्र में पुलिस अधिकारियों की भूमिका का जिक्र किया गया है और इसमें राजनीतिक गुटबाजी, आर्थिक एवं सामाजिक षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पत्र में एसएसपी के माध्यम से परिवार को धमकाने और सुरक्षा को लेकर चिंता जताने जैसी बातें भी सामने आई हैं। साथ ही वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह नामधारी का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सत्ताधारी दल के विधायक को ही इस प्रकार की शिकायत करनी पड़ रही है, तो आम जनता की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की स्थिति क्या होगी। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि विकास केवल कागजों तक सीमित है और जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए न्यायिक जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वायरल पत्र में किए गए दावे कितने सही हैं। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी तेज होने की संभावना है।