उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नरेंद्र नगर पालिका अध्यक्ष पद के दावेदार राजेंद्र गुसाईं की याचिका खारिज, कल ही होंगे चुनाव

Major verdict by Uttarakhand High Court: Petition filed by Narendra Nagar Palika Chairperson aspirant Rajendra Gusain dismissed; elections to be held tomorrow.

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) से टिहरी गढ़वाल की नरेंद्र नगर नगर पालिका के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार राजेंद्र सिंह गुसाईं को चुनाव से ऐन पहले बहुत बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने नामांकन पत्र रद्द करने के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर विस्तृत सुनवाई के बाद उसे पूरी तरह खारिज करते हुए निस्तारित कर दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि उम्मीदवार का नामांकन सभी तथ्यों और रिकॉर्ड्स की गहन जांच के बाद ही निरस्त किया गया था। यह अहम फैसला मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनाया। इस फैसले के बाद अब नरेंद्र नगर नगर पालिका में केवल एक ही उम्मीदवार मैदान में शेष रह गया है, जिससे उनके निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता भी लगभग साफ हो गया है।

सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता ने खंडपीठ के सामने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता राजेंद्र सिंह गुसाईं के नामांकन की कमियां उजागर कीं। आयोग के वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि याची ने अपने नामांकन पत्र में कई महत्वपूर्ण और गलत तथ्य पेश किए थे। राजेंद्र सिंह गुसाईं के पास वर्तमान में 'लाभ का पद' मौजूद है, जिससे उन्हें हर महीने 40 हजार रुपये का नियमित वेतन प्राप्त होता है। उन्होंने जानबूझकर अपने नामांकन हलफनामे में इस मासिक आय का कोई उल्लेख नहीं किया था। आयोग ने कोर्ट को बताया कि इन विसंगतियों को लेकर उम्मीदवार को बाकायदा नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बाद जब विस्तृत जांच की गई, तो तथ्यों को छिपाने के आरोप में उनका नामांकन पूरी तरह निरस्त कर दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय भट्ट ने कोर्ट के सामने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करते हुए दलील दी कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत यह विशेष प्रावधान है कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद, नामांकन पत्र रद्द होने के खिलाफ सीधे उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती। यदि किसी उम्मीदवार को कोई आपत्ति है, तो वह पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद संबंधित 'चुनाव न्यायालय' (इलेक्शन ट्रिब्यूनल) में आधिकारिक चुनाव याचिका दायर कर सकता है। कोर्ट ने इस कानूनी पहलू को स्वीकार किया। निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को राज्य में निकाय चुनावों की वर्तमान स्थिति से भी अवगत कराया। आयोग ने बताया कि पिछले साल किन्हीं अपरिहार्य कारणों से प्रदेश की पांच नगरपालिकाओं में चुनाव संपन्न नहीं हो पाए थे। इनमें से तीन प्रमुख नगरपालिकाओं नरेंद्र नगर, गढ़ीनेगी और पाटी में कल यानी 9 जून को मतदान होने जा रहा है, जबकि किच्छा और सिरोलीकलां में फिलहाल चुनाव नहीं हो रहे हैं। इससे पहले, याचिकाकर्ता राजेंद्र सिंह गुसाईं ने अदालत में तर्क दिया था कि पिछले डेढ़ साल से यहां चुनाव नहीं कराए गए हैं और उनका नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया है। उन्होंने दलील दी थी कि उनका पर्चा निरस्त होने से चुनाव में 'समान अवसर का सिद्धांत' प्रभावित हुआ है, क्योंकि अब मैदान में केवल एक ही प्रत्याशी बचा है जो निर्विरोध जीत जाएगा। उन्होंने 9 जून के चुनाव में प्रतिभाग करने की अंतरिम अनुमति मांगी थी, जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड्स का अवलोकन करने के बाद पूरी तरह से नामंजूर कर दिया।