पीएम मोदी के सोना न खरीदने की अपील और भारी टैक्स से सराफा बाजार में उबाल,आज प्रदेशभर में जलेंगी विरोध की मोमबत्तियां

PM Modi's appeal to refrain from buying gold, coupled with heavy taxation, sparks turmoil in the bullion market; protest candles to be lit across the state today.

देहरादून। देश की अर्थव्यवस्था और परंपराओं में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले स्वर्ण कारोबार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में जनता से सोना न खरीदने की अपील और केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क में की गई बेतहाशा वृद्धि ने देशभर के सराफा कारोबारियों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ आज उत्तराखंड के तमाम सराफा मंडल 'सांकेतिक विरोध प्रदर्शन' करेंगे। बुधवार को 'ज्वैलर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तरांचल' की आपात बैठक में इस विरोध का शंखनाद किया गया। प्रदेश महासचिव गुरजीत सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का सीधा और नकारात्मक असर उन लाखों कारीगरों और व्यापारियों पर पड़ रहा है, जिनका जीवन इस धातु से जुड़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत में सोना केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, शुद्धता और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। हर छोटे-बड़े त्योहार पर सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है, लेकिन सरकार की इस अपील ने इस फलते-फूलते कारोबार को आर्थिक तबाही की ओर धकेल दिया है।

बाजार में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बुधवार को सोने की कीमतों ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। केंद्र सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत करने के फैसले ने बाजार में आग लगा दी है। अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने बताया कि कीमतों में इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी से न केवल मध्यम वर्ग का सपना टूट गया है, बल्कि आने वाले शादी-ब्याह के सीजन में भी भारी मंदी के संकेत मिल रहे हैं। सरकारी नीतियों के प्रति अपना रोष प्रकट करने के लिए आज (बृहस्पतिवार) उत्तराखंड के सभी जिलों में सराफा कारोबारी मोमबत्तियां जलाकर प्रदर्शन करेंगे। राजधानी देहरादून में मुख्य विरोध प्रदर्शन शाम 7 बजे धामावाला स्थित सराफा बाजार में होगा। व्यापारियों का कहना है कि एक तरफ सरकार 'वोकल फॉर लोकल' का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ सदियों पुराने इस स्वदेशी व्यापार को भारी टैक्स और हतोत्साहित करने वाले बयानों से कमजोर किया जा रहा है। कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आयात शुल्क को वापस नहीं लिया गया और व्यापारियों के हितों की रक्षा नहीं की गई, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।