उत्तराखण्डः दयारा बुग्याल ट्रेक पर लापता युवती मामले में बड़ा खुलासा! ट्रेकिंग एजेंसी ने फर्जी अनुमति पत्र बनाकर भेजा दल, क्यूआर कोड स्कैन करते ही खुल गई पोल

Uttarakhand: A major revelation in the case of a missing girl on the Dayara Bugyal trek! A trekking agency sent a team with a fake permit, but the truth was revealed upon scanning the QR code.

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक पर लापता हुई युवती बबीता पांडे के मामले में स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसी द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी ने इस मामले में गंभीर कार्रवाई की जानकारी दी है। विभाग के अनुसार, सिंगल विंडो सिस्टम के आधिकारिक पोर्टल से बबीता पांडे नाम की किसी भी ट्रेकर को अनुमति पत्र जारी नहीं किया गया था। इसके बावजूद एजेंसी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर वन विभाग को जमा किया, जिसकी अब जांच चल रही है। जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी ने बताया कि यदि फर्जी अनुमति पत्र के क्यूआर कोड को स्कैन किया जाए तो मूल नाम ही सामने आते हैं, जो फर्जीवाड़े को साफ तौर पर उजागर करता है।

फर्जी अनुमति पत्र कैसे तैयार किया गया?

जांच में पता चला कि ट्रेकिंग एजेंसी ने पुराने अनुमति पत्र में नामों की काट-छांट करके नया फर्जी दस्तावेज तैयार किया। मूल अनुमति पत्र में कुलदीप सिंह, अनिकेत कुमार शाह, अनंत रंजन, आराधना द्विवेदी और रवि के नाम दर्ज थे।

फर्जी पत्र में इनमें से तीन नाम बदल दिए गए
अनंत रंजन के स्थान पर हरमनप्रीत सिंह
आराधना द्विवेदी के स्थान पर बबीता पांडे
रवि के स्थान पर हरमन पाल सिंह


पर्यटन विभाग की सख्त कार्रवाई
इस गंभीर अनियमितता के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी का पंजीकरण तुरंत निलंबित कर दिया गया है। एजेंसी के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।

सिंगल विंडो सिस्टम ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ क्या है?
जिला प्रशासन ने ट्रेकिंग को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक्सप्लोर उत्तरकाशी नाम से नया पोर्टल विकसित किया है। इसमें ट्रेकर्स को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस और आईडी प्रूफ अपलोड करने के बाद निर्धारित शुल्क जमा करते ही स्वतः अनुमति पत्र जारी हो जाता है। यह व्यवस्था फर्जीवाड़े को रोकने और ट्रेकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।