नीट-यूजी की नई तारीख का एलान: अब 21 जून को होगी परीक्षा, 23 लाख छात्रों का इंतज़ार खत्म, पेपर लीक विवाद के बाद दोबारा होगा एग्जाम
नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी' को लेकर हफ्तों से चल रही अनिश्चितता के बादल अब छंट गए हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी शुक्रवार को आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि रद्द की जा चुकी नीट परीक्षा अब आगामी 21 जून को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर दोबारा आयोजित की जाएगी। पेपर लीक के गंभीर आरोपों और छात्रों के भारी आक्रोश के बाद सरकार ने परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से फिर से कराने का निर्णय लिया है।
गौरतलब है कि देशभर में 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा में लगभग 23 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने भाग लिया था। परीक्षा के तुरंत बाद पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें सामने आने लगी थीं। मामला तूल पकड़ने और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जांच पूरी होने तक परीक्षा को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया था। वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। नीट परीक्षा की नई तारीख का एलान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद किया गया है। गुरुवार को हुई इस अहम बैठक में शिक्षा मंत्रालय और एनटीए के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पिछली बार हुई गलतियों को न दोहराया जाए और एक ऐसी प्रणाली तैयार की जाए जो पूरी तरह से सुरक्षित और पारदर्शी हो। सरकार का स्पष्ट कहना है कि दिन-रात मेहनत करने वाले मेधावी छात्रों के साथ किसी भी कीमत पर अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। एनटीए ने स्पष्ट किया है कि जो छात्र 3 मई की परीक्षा में शामिल हुए थे, उन्हें दोबारा परीक्षा (Re-exam) के लिए किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या आवेदन फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके पुराने एडमिट कार्ड या पंजीकरण के आधार पर ही नए प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। एजेंसी ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें। 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए सुरक्षा के घेरे को पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रों के आवंटन से लेकर प्रश्नपत्रों के वितरण तक की प्रक्रिया में तकनीक का अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। जैमर, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और एआई-आधारित निगरानी को और सख्त बनाया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। परीक्षा की तारीख करीब आने के साथ ही विशेषज्ञों ने छात्रों को अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने की सलाह दी है। शिक्षाविदों का कहना है कि अब छात्रों के पास लगभग एक महीने का समय है। इस समय का उपयोग मॉक टेस्ट और रिवीजन के लिए करना चाहिए। यह परीक्षा देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश का एकमात्र रास्ता है। ऐसे में सरकार और एनटीए के लिए 21 जून की परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है।