देहरादून डकैती काण्डः नौकर ही मास्टरमाइंड, दिल्ली में भी डकैती के मामले में जेल जा चुका है आरोपी! नेपाल भागने की आशंका, सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी
देहरादून। राजधानी देहरादून के पॉश इलाके बसंत विहार में भाजपा पार्षद अमिता सिंह के घर हुई डकैती के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि करीब 25 दिन पहले घर में काम करने के लिए रखा गया नौकर भरत थापा ही कथित तौर पर पूरी साजिश का मुख्य आरोपी है। आरोप है कि भरत ने पहले खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर पार्षद, उनके पति महीपाल सिंह और बेटे को बेहोश किया। इसके बाद उसने अपने चार साथियों को घर बुलाया और लॉकर तोड़कर नकदी व लाखों रुपये के जेवर लेकर फरार हो गया। फिलहाल मुख्य आरोपी भरत थापा पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस को उसके नेपाल भागने की आशंका है। इसके मद्देनजर उत्तराखंड-नेपाल सीमा पर चेकिंग बढ़ा दी गई है। पुलिस की कई टीमें आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश देने के साथ ही उसके संपर्क सूत्रों और मोबाइल गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने वारदात से पहले परिवार का विश्वास हासिल किया। घटना वाली रात परिवार ने करीब 10 बजे खाना खाया। पार्षद के पति महीपाल सिंह के अनुसार खाना खाने के बाद उन्हें कब नींद आ गई, इसका उन्हें पता ही नहीं चला। रात करीब 1:20 बजे उनकी आंख खुली तो उन्होंने बेडरूम में नौकर भरत के साथ दो अन्य लोगों को देखा। महीपाल सिंह को उस समय समझ में आ गया कि घर में लूटपाट की जा रही है। हालांकि खाने में मिलाए गए नशीले पदार्थ के असर के कारण वह ठीक से उठ या विरोध नहीं कर पा रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने किसी तरह खुद को संभाला और पड़ोसी के घर तक पहुंचे। वहां उन्होंने इशारों के जरिए घटना की जानकारी दी। इसके बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने तक आरोपी घर से नकदी और जेवर लेकर फरार हो चुके थे। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और परिवार के सदस्यों से जानकारी जुटाई। पीड़ित परिवार के मुताबिक बदमाश घर में रखे दो लॉकरों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की संपत्ति ले गए। एक लॉकर में रखी करीब तीन लाख रुपये की नकदी गायब मिली, जबकि दूसरे लॉकर को तोड़कर उसमें रखे करीब 30 से 40 लाख रुपये के जेवरात ले जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब चोरी और डकैती में गई संपत्ति का वास्तविक मूल्य और पूरी सूची तैयार करने में जुटी है। इसके साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वारदात में भरत के साथ कौन-कौन लोग शामिल थे और सभी आरोपी किस रास्ते से मौके से फरार हुए।
ऑनलाइन प्लेसमेंट एजेंसी के जरिये 25 दिन पहले आया था घर
जांच में सामने आया है कि भरत थापा को करीब 25 दिन पहले दिल्ली की एक ऑनलाइन प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से घरेलू काम के लिए रखा गया था। बताया गया है कि पार्षद की बेटी मेघा ने दिल्ली निवासी संजीव से संपर्क किया था। इसी संपर्क के जरिए भरत थापा परिवार के घर में काम करने पहुंचा था। कम समय में ही उसने परिवार का विश्वास हासिल कर लिया। पुलिस के अनुसार इसी विश्वास का फायदा उठाकर उसने घर की व्यवस्था, सदस्यों की दिनचर्या और लॉकर आदि की जानकारी हासिल की और कथित तौर पर अपने साथियों के साथ वारदात की योजना बनाई। मामले में एक अहम लापरवाही यह भी सामने आई है कि घर में काम करने के लिए रखे गए भरत थापा का स्थानीय पुलिस से सत्यापन नहीं कराया गया था। परिवार ने प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए उसे काम पर रखा था, लेकिन उसकी पृष्ठभूमि की स्थानीय स्तर पर पुलिस जांच नहीं कराई गई। अब पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि भरत को उपलब्ध कराने वाली प्लेसमेंट एजेंसी ने उसकी पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि की कितनी जानकारी जुटाई थी। दिल्ली स्थित संबंधित प्लेसमेंट एजेंट को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए जांच के दायरे में लिया है।
दिल्ली में भी डकैती के मामले में जेल जा चुका है भरत
एसपी सिटी शेखर सुयाल के अनुसार पुलिस जांच में भरत थापा का आपराधिक इतिहास सामने आया है। पुलिस के मुताबिक वह दिल्ली में भी इसी तरह की डकैती के एक मामले में जेल जा चुका है और करीब एक साल जेल में रहा था। जेल से बाहर आने के बाद वह अपने देश चला गया था। पुलिस का कहना है कि भारत लौटने के बाद उसने दूसरी प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से काम हासिल किया और देहरादून पहुंचा। यहां करीब 25 दिन तक घर में काम करने के बाद उसने कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया। अब पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और दिल्ली में दर्ज मामले की भी जानकारी जुटा रही है, ताकि उसकी पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि सामने आ सके। भरत को घर तक पहुंचाने वाले दिल्ली के प्लेसमेंट एजेंट की भूमिका को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस एजेंसी संचालक से पूछताछ की तैयारी कर रही है। जांच का एक अहम बिंदु यह है कि क्या एजेंसी को भरत के आपराधिक इतिहास की जानकारी थी या नहीं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भरत ने वारदात से पहले किन लोगों से संपर्क किया था और क्या उसके साथियों को पहले से घर की स्थिति और लॉकरों की जानकारी थी। मोबाइल फोन और तकनीकी सर्विलांस के जरिए इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
नेपाल भागने की आशंका, सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी
मुख्य आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस को उसके नेपाल भागने की आशंका है। इसी को देखते हुए उत्तराखंड-नेपाल सीमा पर चेकिंग बढ़ा दी गई है। पुलिस टीमें आरोपी के संभावित ठिकानों और संपर्क सूत्रों की जानकारी जुटा रही हैं। इसके अलावा मोबाइल सर्विलांस की मदद से उसके संपर्क में रहने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं। वारदात में शामिल उसके कथित साथियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी भी जांच की प्राथमिकता में है। बसंत विहार जैसे पॉश इलाके में भाजपा पार्षद के घर हुई इस वारदात ने घरेलू सहायकों के पुलिस सत्यापन और प्लेसमेंट एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब न सिर्फ फरार मुख्य आरोपी और उसके साथियों की तलाश में जुटी है, बल्कि इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से परिवार तक कैसे पहुंचा।