नैनीताल:नरेश पाण्डे की अग्रिम जमानत अर्जी सुनवाई योग्य, कोर्ट ने राज्य से मांगी रिपोर्ट,अगली सुनवाई 26 मई को,लिंक में पढ़ें क्या कुछ कहा कोर्ट ने
नैनीताल के सेशन न्यायाधीश प्रशान्त जोशी की अदालत ने अभियुक्त नरेश पाण्डे की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए उसे विधिसम्मत रूप से सुनवाई योग्य माना है। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करने तथा संबंधित थाने से विस्तृत आख्या एवं अभियुक्त का आपराधिक इतिहास तलब करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता संजय सुयाल तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता पंकज कुलौरा उपस्थित हुए, जबकि राज्य की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने पक्ष रखा।
अभियुक्त पक्ष ने अदालत को बताया कि मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351(2) एवं 69 से संबंधित है और उत्तराखण्ड संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत अग्रिम जमानत पर लगाया गया प्रतिबंध इस प्रकरण में लागू नहीं होता। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा समान धाराओं में कई अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई कर आदेश पारित किए जा चुके हैं।
वहीं राज्य पक्ष ने विरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अभियुक्त ने नाबालिग अवस्था से विवाह का झांसा देकर उसका लैंगिक शोषण किया। इसलिए यह मामला उत्तराखण्ड संशोधन अधिनियम, 2019 की धारा 6 के तहत आता है, जहां अग्रिम जमानत का प्रावधान प्रतिबंधित है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482(4) का परीक्षण किया और कहा कि अग्रिम जमानत पर रोक केवल भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2), 65 तथा 70(2) से जुड़े मामलों में लागू होती है। वर्तमान प्रकरण में इन धाराओं के तहत कोई अभियोग दर्ज नहीं है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखण्ड संशोधन अधिनियम, 2019 की धारा 6 विशेष रूप से भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376 की कुछ उपधाराओं एवं पॉक्सो अधिनियम से जुड़े गंभीर अपराधों पर लागू होती है। जबकि वर्तमान एफआईआर में प्रथम दृष्टया ऐसे आरोप या पॉक्सो एक्ट की धाराएं दर्ज नहीं हैं।
न्यायालय ने कहा कि इस चरण पर केवल अग्रिम जमानत अर्जी की संधार्यता पर विचार किया जा रहा है, इसलिए आरोपों के गुण-दोष पर विस्तृत टिप्पणी आवश्यक नहीं है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान परिस्थितियों में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र विधिक रूप से सुनवाई योग्य है।
इसके बाद न्यायालय ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को विधिवत दर्ज करने, राज्य को नोटिस जारी करने तथा संबंधित थाने से विस्तृत रिपोर्ट और अभियुक्त का आपराधिक इतिहास प्रस्तुत करने के आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को निर्धारित की गई है।