नैनीताल:संवेदनशील वन क्षेत्र में बिक रही थीं मैगी और प्लास्टिक बोतलें!नैना पीक की वन चौकी में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर उठे सवाल, विधिक सेवा प्राधिकरण ने डीएफओ को दिए जांच के निर्देश
नैनीताल। नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल एवं पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र नैना पीक (चाइना पीक) स्थित वन चौकी में कथित रूप से संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UKSLSA) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्राधिकरण के सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि (एच.जे.एस.) ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ), नैनीताल को निर्देश जारी किए हैं।
प्राधिकरण की ओर से जारी पत्र के अनुसार सदस्य-सचिव ने 14 जून को नैना पीक क्षेत्र का भ्रमण किया था। इस दौरान उन्होंने वन चौकी पर तैनात एक वन रक्षक को मैगी, पैकेज्ड पेयजल, कोल्ड ड्रिंक्स और बिस्कुट जैसी वस्तुएं बेचते हुए देखा। पूछताछ करने पर वन रक्षक ने दावा किया कि उसे इसके लिए विभागीय अनुमति प्राप्त है। इसके बाद मामले की वैधानिकता और विभागीय नियमों के अनुरूपता को लेकर प्रश्न खड़े हो गए।
अपने पत्र में सदस्य-सचिव ने कहा है कि ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में पैकेज्ड खाद्य एवं पेय पदार्थों की बिक्री से प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे की मात्रा बढ़ रही है, जो पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन विभाग की मूल जिम्मेदारी वन संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है। ऐसे में वन चौकी परिसर के भीतर व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन गंभीर विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्राधिकरण ने डीएफओ नैनीताल को निर्देशित किया है कि यदि संबंधित वन रक्षक को किसी प्रकार की अनुमति प्रदान की गई है तो उसके कानूनी आधार, नियमों और वन विभाग की नीतियों के अनुरूप होने की जांच की जाए। वहीं यदि कोई वैध अनुमति उपलब्ध नहीं है तो संबंधित कर्मी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही प्राधिकरण ने संवेदनशील वन क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पत्र की प्रतियां प्रमुख वन संरक्षक (HoFF/PCCF) तथा मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
इस कार्रवाई के बाद नैना पीक जैसे संवेदनशील पर्यटन एवं वन क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की वैधता, पर्यावरणीय प्रभाव और विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।