नैनीताल:देहरादून में बिंदाल-रिस्पना फोर लेन प्रोजेक्ट से पर्यावरण और विस्थापन का खतरा? हाई कोर्ट ने मांगा पूरा रिकॉर्ड ,मामले में अब सभी याचिकाएं एक साथ होंगी सूचीबद्ध
देहरादून एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट पर हाई कोर्ट सख्त, 15 अप्रैल को अगली सुनवाई
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने देहरादून शहर को जाम मुक्त बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित बिंदाल-रिस्पना फोर लेन एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिए कि इसी विषय से संबंधित पहले से दायर दो अन्य जनहित याचिकाओं को भी इस याचिका के साथ सूचीबद्ध किया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है।
देहरादून निवासी अनूप नौटियाल द्वारा दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार शहर की ट्रैफिक समस्या को कम करने के लिए इस बड़े एलिवेटेड प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसके लिए रोडमैप तैयार किया जा चुका है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। याचिका में आशंका जताई गई है कि इस परियोजना के चलते कई लोगों के घर और जमीन प्रभावित होंगे, जिससे वे भूमिहीन हो सकते हैं और उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही, क्षेत्र की भूमि की भार वहन क्षमता पर भी सवाल उठाए गए हैं और यह भी कहा गया है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में भी बाधा आ सकती है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि यदि सरकार इस परियोजना को लागू करती है तो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाए और स्थानीय निवासियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए, न कि केवल पर्यटकों के यात्रा समय को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल परियोजना का रोडमैप ही तैयार हुआ है और इस विषय में पहले से ही दो जनहित याचिकाएं न्यायालय में लंबित हैं। अब हाई कोर्ट सभी याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए इस महत्वपूर्ण परियोजना पर विस्तृत विचार करेगा।