नैनीताल बैंक कर्मचारी संघ का हेड ऑफिस पर प्रदर्शन! कर्मचारियों ने प्रबंधन पर उत्पीड़न और मनमाने तबादलों का लगाया आरोप, उग्र आंदोलन की चेतावनी
नैनीताल। नैनीताल बैंक कर्मचारी संघ ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सोमवार को नैनीताल बैंक के प्रधान कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने बैंक प्रबंधन पर कर्मचारियों का उत्पीड़न करने, मनमाने तरीके से तबादले करने और पूर्व में हुए समझौतों की अनदेखी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की होगी। प्रदर्शनकारियों ने बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और आरोप लगाया कि प्रबंधन लगातार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहा है। कर्मचारी संघ का कहना है कि बैंक प्रशासन डिप्लॉयमेंट यानी तैनाती के नाम पर वरिष्ठ और निष्ठावान कर्मचारियों का मनमाने ढंग से तबादला कर रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि बैंक प्रबंधन के साथ विभिन्न बैठकों और चर्चाओं के दौरान इस बात पर सहमति बनी थी कि बैंक के आकार और उसके व्यवसायिक हितों को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय समझौते की पवित्रता को बनाए रखा जाएगा तथा भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन लगातार एकतरफा निर्णय लेकर कर्मचारियों के हितों को प्रभावित कर रहा है।
कर्मचारी संघ ने कहा कि लंबे समय से कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित पड़े हुए हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इनमें विशेष सहायकों की पोस्टिंग, मुख्य रोकड़पालों (हेड कैशियर्स) को स्थायी पदनाम देने, पदोन्नति संबंधी मामलों का निस्तारण तथा स्टाफ यूनियन के राज्य पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के तबादलों के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई को तत्काल वापस लेने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। संघ का आरोप है कि प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों पर दबाव बनाने और यूनियन गतिविधियों को कमजोर करने के उद्देश्य से तबादलों का सहारा लिया जा रहा है, जो औद्योगिक संबंधों को खराब करने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो बैंक में औद्योगिक अशांति की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रबंधन पर होगी। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने मांग की कि बैंक प्रबंधन सभी मुद्दों पर जल्द से जल्द कर्मचारी संघ के साथ औपचारिक वार्ता शुरू करे और आपसी सहमति के आधार पर समाधान निकाले। उनका कहना है कि संवाद ही समस्याओं के समाधान का सर्वोत्तम माध्यम है, लेकिन यदि प्रबंधन अपनी मनमानी जारी रखता है तो कर्मचारी संघ को मजबूरन बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ना पड़ेगा।