वैश्विक मंच पर ऐतिहासिक मोड़:अमेरिका और ईरान में 'शांति समझौता',पीएम मोदी ने किया स्वागत,इस्राइल ने दिखाए तीखे तेवर

A historic turning point on the global stage: 'Peace agreement' between the US and Iran; PM Modi welcomes the move, while Israel adopts a sharp stance.

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में लंबे समय से जारी तनाव और युद्ध के बाद आखिरकार वैश्विक शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक और युगांतकारी सफलता मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक बड़े 'शांति समझौते' पर सहमति बनने का एलान कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस ऐतिहासिक समझौते का चौतरफा असर दिखना शुरू हो गया है। एक तरफ जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कदम का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी बताया है, वहीं दूसरी तरफ इस्राइल ने इस समझौते को मानने से साफ इनकार करते हुए अपने कड़े तेवर दिखाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बड़े एलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक विशेष पोस्ट साझा कर भारत का रुख स्पष्ट किया। पीएम मोदी ने लिखा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक उथल-पुथल हुई है और कई देशों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। पीएम मोदी ने आगे उम्मीद जताते हुए कहा कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि बाकी बचे विवादित मुद्दों पर भी दोनों देश बातचीत जारी रखेंगे, जिससे एक टिकाऊ और अंतिम समझौता हो सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस शांति समझौते के तहत अमेरिका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से अपनी आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म करेगा। इसके बदले में ईरान भी अंतरराष्ट्रीय जहाजों और व्यापारिक कार्गो की मुक्त व सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। ईरान की सरकार ने भी इस समझौते पर अपनी सहमति की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। जानकारी के अनुसार, आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में दोनों देशों के प्रतिनिधि इस समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। इस महामुलाकात और समझौते की खबर का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तुरंत देखने को मिला है। महीनों से जारी आर्थिक अनिश्चितता के बादल छंटते ही दुनियाभर के शेयर बाजारों में जबरदस्त उत्साह और तेजी (बूम) दर्ज की गई। सोमवार को एशियाई बाजारों में भारी बढ़त देखी गई। सबसे बड़ी राहत की खबर ईंधन के मोर्चे पर आई है; वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में महंगाई से राहत मिलने और हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। इस ऐतिहासिक शांति समझौते के बीच सबसे बड़ी चिंता और अड़चन इस्राइल की तरफ से आई है। इस्राइल ने इस समझौते का खुलकर और कड़ा विरोध किया है। इस्राइल के फायरब्रांड सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा, "यह समझौता इस्राइल पर कतई लागू नहीं होता है। इस्राइल एक आजाद और संप्रभु राष्ट्र है और वह अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद करने में सक्षम है। बेन ग्वीर ने आगे कहा कि इस्राइल अमेरिका का सम्मान करता है और राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी है, लेकिन जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की आएगी, तो कोई भी बाहरी या अंतरराष्ट्रीय समझौता उनके निर्णयों को नियंत्रित नहीं कर सकता। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि से ऊपर इस्राइल की सुरक्षा और उसके नागरिकों की रक्षा है और अतीत में अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने की भारी कीमत इस्राइल को चुकानी पड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान का एक मंच पर आना वैश्विक व्यापार के लिए संजीवनी जैसा है, लेकिन इस्राइल के इस बागी रुख के बाद पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की राह इतनी आसान भी नहीं होगी। अब सबकी नजरें शुक्रवार को जिनेवा में होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं।