नैनीताल:ज्योलीकोट में जलजनित बीमारी पर चौतरफा कार्रवाई, 380 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण,ओपीडी फ्री, पानी के नमूने लिए, स्कूल में दूषित पानी पर रोक,टैंकरों से जल आपूर्ति
नैनीताल
ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में जलजनित बीमारी के मामलों के बीच प्रशासन ने स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण और सैंपलिंग की, जबकि जल संस्थान ने टैंकरों के जरिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के साथ पेयजल लाइनों और स्रोतों की जांच व क्लोरीनेशन का काम किया। इस बीच सेंट एंथोनीज कॉन्वेंट स्कूल में अस्वच्छ पानी पाए जाने के बाद उप जिलाधिकारी/परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय ने संबंधित पानी के उपयोग और वितरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ज्योलीकोट क्षेत्र में गुरुवार को स्वास्थ्य टीमों ने 105 लोगों की जांच कर 72 ब्लड सैंपल लिए, जबकि क्षेत्र से पानी के सात नमूने भी जांच के लिए लिए गए। इसके अलावा गांजा, वीरभट्टी, बेलुवाखान, सरियाताल, ज्योलीकोट और भल्यूटी-चोपड़ा में लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में कुल 380 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। लोगों को आवश्यक दवाएं, ओआरएस, जिंक और क्लोरीन की गोलियां वितरित करने के साथ जलजनित रोगों से बचाव के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी गई।
प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के लिए सचल चिकित्सा वाहन भी तैनात किया गया है। इसके माध्यम से लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य परीक्षण, जांच, दवाएं और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट की ओपीडी पर्ची भी निःशुल्क कर दी गई है। गुरुवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पीएचसी में ओपीडी की, जबकि शुक्रवार को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
जल संस्थान ने भी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को लेकर व्यापक अभियान चलाया। विभाग के अनुसार चार टैंकरों और पिकअप के माध्यम से रामलीला ग्राउंड, डाक बंगला, ज्योलीकोट मार्केट, बेलुवाखान के अमुवा और गांजा तोक में 110 परिवारों को करीब 15,500 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया। देवलदुंगा की 500 मीटर लाइन की फ्लशिंग की गई, जबकि छीड़ा तोक की मुख्य पेयजल लाइन को फ्लशिंग के बाद टैंकर से जोड़कर आपूर्ति बहाल की गई। विभाग का दावा है कि पेयजल से संबंधित 14 शिकायतों का निस्तारण भी किया गया है।
जल संस्थान की टीम ने रामलीला ग्राउंड, दुर्गापुर और वीरभट्टी स्रोत समेत विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने लिए। शेरमुख स्रोत की जांच और सफाई कराई गई तथा आठ पेयजल नमूने एकत्र किए गए। वीरभट्टी क्षेत्र में पुरानी पेयजल लाइन की जांच के दौरान विभाग ने क्लोरीनेशन को संतोषजनक बताया। वीरभट्टी के आसपास के जलपान गृहों को भी शुद्ध पेयजल के इस्तेमाल को लेकर जागरूक किया गया और हाईपोक्लोराइड उपलब्ध कराया गया। अमुवा और गांजा तोक में पाइप लाइन की मरम्मत तथा टैंकों में क्लोरीनेशन का काम भी कराया गया।
दुर्गापुर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण भी किया गया। प्रेमा साह जगाती स्कूल के समीप पहले सामने आए सीवर रिसाव की स्थायी रोकथाम के लिए करीब 100 मीटर मुख्य सीवर लाइन को बाईपास करने का काम प्रगति पर बताया गया है। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत बसानी/डाबर स्रोत से निर्मित 100 किलोलीटर क्षमता के टैंक को मुख्य लाइन से जोड़कर पेयजल आपूर्ति सुचारू करने की संभावनाओं का भी निरीक्षण किया गया।
सेंट एंथोनीज कॉन्वेंट स्कूल में पानी की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायत की जांच के बाद उप जिलाधिकारी/परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय ने विद्यालय परिसर की पानी की टंकियों में अस्वच्छ जल पाए जाने के आधार पर उस पानी के पेयजल के रूप में उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। विद्यालय प्रबंधन को टंकियों की सफाई और विसंक्रमण कराने, पानी के नमूने अधिकृत प्रयोगशाला में भेजने तथा विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था तत्काल करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों का अनुपालन 13 सितंबर तक सुनिश्चित करने और 14 सितंबर को अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है।
उधर, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे ने हल्द्वानी के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती ज्योलीकोट क्षेत्र के मरीजों का हालचाल जाना और उपचार व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने उजाला सिग्नस, नीलकंठ, वात्सल्य मदर एंड चाइल्ड केयर तथा चंदन अस्पताल में मरीजों के उपचार की जानकारी ली और अस्पताल प्रबंधन व स्वास्थ्य अधिकारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा उपचार में लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। आयुष्मान कार्ड की सुविधा वाले अस्पतालों में जरूरत के अनुसार मरीजों को रेफर करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि उपचार में आर्थिक परेशानी न हो।
जलजनित बीमारी और असामयिक मृत्यु के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में गहन सर्वेक्षण, मरीजों की जानकारी जुटाने, स्वास्थ्य शिविर बढ़ाने और प्रभावित लोगों तक दवा व उपचार की सुविधा पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग को जिला प्रशासन और पेयजल विभाग के साथ समन्वय कर बीमारी की रोकथाम के उपायों की लगातार निगरानी करने तथा विभागीय गतिविधियों की जानकारी आमजन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने को भी कहा गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने लोगों से पानी को अच्छी तरह उबालकर पीने, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने और किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा स्वास्थ्य टीम से संपर्क करने की अपील की है।