उत्तराखण्डः हरिद्वार में गंगा किनारे अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त! ड्रेजिंग पॉलिसी को भी चुनौती, 22 सितंबर को होगी विस्तृत सुनवाई
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले में विस्तृत सुनवाई करने के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान ड्रेजिंग पॉलिसी का अनुपालन न करने का मुद्दा भी याचिकाकर्ता की तरफ से यह प्रश्न कोर्ट के सामने उठाया गया। जिसमें कहा गया कि कोर्ट के आदेशों का अनुपालन नही हो रहा है। सभी पक्षकारों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, जिसके लिए आज समय पर्याप्त नहीं है। यह मामला पहले से ही उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ के समक्ष सुनवाई हेतु विचाराधीन था। अब मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस मामले में पुनः से सुनवाई कर रही है। इसलिए मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए कोर्ट 22 सितंबर की तिथि नियत करती है। अब पीठ को अब तक हुए पारित सभी आदेशों का अवलोकन भी करना है। इसलिए मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तिथि नियत की जाती है। मामले के अनुसार वर्ष 2022 में हरिद्वार की मातृ सदन ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। गंगा नदी में खनन करने वाले नेशनल मिशन क्लीन गंगा को पलीता लगा रहे हैं। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाए, ताकि गंगा नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके। अब खनन कुम्भ क्षेत्र में भी किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसीजी बोर्ड गठित किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाए रखना है। एनएमसीजी द्वारा राज्य सरकार को बार-बार आदेश दिए गए कि यहां खनन कार्य नहीं किया जाय। उसके बाद भी राज्य सरकार के द्वारा यहां खनन कार्य करवाया जा रहा है। पूर्व में यूएन ने भी भारत सरकार को निर्देश दिए थे कि गंगा को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उसके बाद भी सरकार द्वारा गंगा के अस्तित्व को समाप्त किया जा रहा है। इसलिए गंगा में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाय।