राम मंदिर चढ़ावा गबन पर बड़ा खुलासा: ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी जांच के घेरे में, पीएमओ तक पहुंची गोपनीय रिपोर्ट
लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गबन और अनियमितताओं के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच में न केवल गणनाकर्मियों बल्कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी करीब 150 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाना है। रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं, निगरानी व्यवस्था की विफलता और कई लोगों की संदिग्ध भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि मंदिर में आने वाले दान की राशि के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती गई। एसआईटी की जांच में लगभग 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें गणनाकर्मी, ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी और कुछ प्रभावशाली व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं। टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प सहित कुछ लोगों से 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। पूछताछ में मिले जवाबों को संतोषजनक नहीं माना गया और कई जगह विरोधाभास पाए गए। जांच एजेंसियों को इनके ठिकानों से नकदी बरामद होने के भी प्रमाण मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि टिन्नू यादव की भूमिका सबसे अधिक संदेह के घेरे में है। वह पहले ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है और बाद में मंदिर से जुड़े कई कार्यों में उसका प्रभाव बढ़ गया था। प्रस्तावित एफआईआर में उसे मुख्य आरोपी बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। उसके साथ गणनाकर्मियों और अन्य सहयोगियों को भी आरोपी बनाया जा सकता है। वहीं कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीएमओ भी सक्रिय हो गया है। जानकारी के अनुसार, पीएमओ के अधिकारियों ने अयोध्या पहुंचकर स्वतंत्र स्तर पर जांच-पड़ताल की और एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली भेजी है। इस रिपोर्ट में भी हेरफेर, लापरवाही और कुछ पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका का उल्लेख किया गया है। यही कारण है कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट के पुनर्गठन से लेकर प्रशासनिक बदलाव तक की संभावना जताई जा रही है। एसआईटी ने अपनी जांच में पाया कि मंदिर में दान राशि की गणना के लिए लगभग 40 कर्मचारियों की टीम कार्यरत थी, जिसमें बैंक और ट्रस्ट दोनों के कर्मचारी शामिल थे। गणना प्रक्रिया में गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद सभी पुराने गणनाकर्मियों को हटा दिया गया है। उनकी जगह नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है और निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाया गया है। अब ट्रस्ट पदाधिकारियों और बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में ही चढ़ावे की गणना कराई जा रही है। जांच एजेंसी ने मंदिर ट्रस्ट और संबंधित अधिकारियों को अयोध्या नहीं छोड़ने का निर्देश भी दिया है। वहीं, विस्तृत जांच के लिए एसआईटी को दो से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि आगे की विवेचना वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में गठित विशेष टीम से कराई जा सकती है। राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और प्रबंधन की लापरवाही से जुड़े खुलासों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली एसआईटी रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में सामने आए आरोप सही साबित होते हैं तो यह राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई साबित हो सकती है।