उत्तराखण्डः दो महीने के लिए बंद होगी पाताल भुवनेश्वर गुफा! 11 अगस्त से 10 अक्टूबर तक श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक, लिंक में जानें क्या है वजह?
बेरीनाग। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की प्रसिद्ध और ऐतिहासिक पाताल भुवनेश्वर गुफा में इस वर्ष भी मानसून के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के प्रवेश पर अस्थायी रोक रहेगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 11 अगस्त से 10 अक्टूबर 2026 तक गुफा को आम लोगों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया है। इस अवधि में कोई भी श्रद्धालु गुफा के भीतर प्रवेश नहीं कर सकेगा। एएसआई के अनुसार, बरसात के मौसम में गुफा के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने और अन्य प्राकृतिक जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। एएसआई के देहरादून मंडल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मानसून के दौरान गुफा के भीतर हवा का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो जाता है। इसके कारण ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कम हो सकता है, जो गुफा में प्रवेश करने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है। वरिष्ठ संरक्षण सहायक की रिपोर्ट और एएसआई मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। विभाग का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए यह कदम उठाया गया है। अब श्रद्धालुओं को पाताल भुवनेश्वर के दर्शन के लिए लगभग दो महीने इंतजार करना होगा। मानसून समाप्त होने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद ही गुफा को दोबारा खोला जाएगा। एएसआई और मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रतिबंधित अवधि के दौरान यात्रा की योजना न बनाएं और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। पाताल भुवनेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष नीलम सिंह भंडारी ने बताया कि पिछले वर्ष भी मानसून के दौरान लगभग दो महीने तक गुफा को बंद रखा गया था। उन्होंने कहा कि इस बार भी ऑक्सीजन की कमी और सुरक्षा संबंधी संभावित खतरों को देखते हुए यही निर्णय लिया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि गुफा दोबारा खुलने के बाद दर्शन की व्यवस्था पूर्ववत कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पाताल भुवनेश्वर गुफा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गुफा के भीतर चार प्रमुख द्वार हैं, जो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग का प्रतीक माने जाते हैं। इनमें से तीन द्वार खुले हैं, जबकि एक द्वार बंद है। लोक मान्यता है कि जिस दिन चौथा द्वार खुलेगा, उसी दिन कलियुग का अंत होगा। गुफा के पुजारी नीलम भंडारी के अनुसार, अयोध्या के राजा ऋतुपर्ण भगवान शिव के परम भक्त थे और उन्होंने ही सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। पौराणिक संदर्भों में इस गुफा का उल्लेख हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। अपनी रहस्यमयी संरचनाए धार्मिक आस्था और प्राकृतिक विशेषताओं के कारण पाताल भुवनेश्वर देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचे, लेकिन अब मानसून अवधि के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गुफा को अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा।