प्याज किसानों को केंद्र की बड़ी राहत: ₹1235 प्रति क्विंटल पर सीधी खरीद शुरू, लेकिन किसान असंतुष्ट; ₹3000 के भाव और मुआवजे की मांग
लगातार गिरते दामों और निर्यात में आ रही रुकावटों की चौतरफा मार झेल रहे देश के प्याज उत्पादक किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने संकट में फंसे किसानों को फौरी राहत देने के लिए सीधे तौर पर उनसे प्याज खरीदने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने तय किया है कि वह ₹1235 प्रति क्विंटल (यानी ₹12.35 प्रति किलोग्राम) के भाव से किसानों से सीधे प्याज की खरीद करेगी।
देशभर में लगातार गिरते प्याज के दामों और निर्यात संकट से परेशान किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। सरकार ने फैसला लिया है कि वह किसानों से सीधे 1235 रुपये प्रति क्विंटल यानी 12.35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदेगी। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब देश के कई राज्यों में प्याज उत्पादक किसान लागत तक निकाल पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार के इस फैसले से किसानों को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन दूसरी तरफ किसान संगठनों ने इसे नाकाफी बताते हुए बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भी दे दी है। महाराष्ट्र के सतारा में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में इस खरीद योजना का औपचारिक ऐलान किया। कृषि मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान पर अमेरिका-इस्राइल हमलों और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण प्याज का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विदेशों में माल की खपत कम होने से घरेलू बाजार में प्याज की भारी आवक हुई, जिससे कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि किसानों को हो रहे नुकसान को कम करने और बाजार में स्थिरता लाने के लिए यह फैसला लिया गया है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार आज से ही खरीद प्रक्रिया शुरू कर रही है और किसानों के पास मौजूद पूरा स्टॉक खरीदने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने को भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ विशेष निर्देश जारी किए हैं, ताकि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और तेज गति से पूरी हो सके। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी किसानों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस योजना को सफल बनाने में हरसंभव सहयोग करेगी और किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से बाजार में प्याज की कीमतों में स्थिरता आएगी और किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
हालांकि, सरकार के इस फैसले के बाद भी महाराष्ट्र के किसान पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगाँव प्याज़ मंडी से जुड़े किसानों और संगठनों ने सरकार के घोषित मूल्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। किसानों का कहना है कि 1235 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य उनकी लागत तक नहीं निकाल पा रहा है। बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन जैसी लागत लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि बाजार में उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहा। महाराष्ट्र राज्य प्याज़ उत्पादक संघ ने सरकार के इस फैसले को अपर्याप्त बताते हुए समर्थन मूल्य बढ़ाकर कम से कम 3000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जब तक किसानों को उनकी लागत और मेहनत के अनुरूप दाम नहीं मिलेगा, तब तक इस तरह की खरीद योजनाएं केवल अस्थायी राहत साबित होंगी। किसान नेताओं ने यह भी मांग उठाई है कि जिन किसानों ने पिछले कुछ महीनों में मजबूरी में बेहद कम कीमतों पर प्याज बेच दिया, उन्हें सरकार विशेष आर्थिक सहायता या मुआवजा दे। उनका तर्क है कि लगातार घाटे के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं और कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। किसानों की नाराजगी यहीं खत्म नहीं हुई। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समर्थन मूल्य बढ़ाने और मुआवजे की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। किसान संगठनों का कहना है कि सिर्फ घोषणाओं से किसानों की हालत नहीं सुधरेगी, बल्कि उन्हें वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम तत्काल राहत देने वाला जरूर है, लेकिन लंबे समय तक प्याज किसानों की स्थिति सुधारने के लिए निर्यात नीति, भंडारण व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करना होगा। फिलहाल किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार की यह खरीद योजना जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या वास्तव में इससे किसानों को आर्थिक संबल मिल पाएगा या नहीं।