सितारगंज में पीलिया का कहरः मासूम की मौत के बाद दहशत में लोग! 40 से अधिक बच्चे बीमार, दूषित पानी या लापरवाही?
सितारगंज। ऊधम सिंह नगर जनपद के सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के नयागांव में पीलिया के प्रकोप ने एक मासूम की जान ले ली, जबकि 40 से अधिक बच्चे बीमारी की चपेट में बताए जा रहे हैं। 10 वर्षीय अल्तमश की मौत के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि मृतक बालक अल्तमश की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। मृतक की बहन भी पीलिया की चपेट में है और उसका उपचार रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। गांव में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने की घटना ने प्रशासनिक तंत्र की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। बीमारी के लक्षण सामने आने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए, यह बड़ा सवाल बन गया है। जानकारी के अनुसार गांव के 40 से अधिक बच्चे बुखार, कमजोरी, सीने में दर्द, उल्टी और पीलिया जैसे लक्षणों से पीड़ित हैं। जांच में अधिकांश बच्चों में काला पीलिया (हेपेटाइटिस) के लक्षण पाए गए हैं। बीमार बच्चों में मोहम्मद अरमान, सुफियान सूरी, मोहम्मद रहमान, मोहम्मद साद, मोहम्मद जुनेर, मोहम्मद उजेफ, मुजाहिद समेत कई बच्चे निजी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। कुछ परिवार अपने बच्चों को बेहतर इलाज के लिए रुद्रपुर और अन्य शहरों के निजी अस्पतालों में ले गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से बच्चों की तबीयत खराब हो रही थी, लेकिन बीमारी के फैलाव को लेकर समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया है। विभाग का प्राथमिक अनुमान है कि दूषित पानी या दूषित भोजन के सेवन के कारण संक्रमण फैला हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने पेयजल विभाग को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया है। इसके बाद दोनों विभागों की टीमों ने गांव में लगे पानी के टैंकों, हैंडपंपों और नलों से पानी के नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पेयजल स्रोतों में पहले से गड़बड़ी थी तो उसकी नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई? और यदि दूषित पानी ही बीमारी की वजह है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी सितारगंज के इस्लामनगर क्षेत्र में बकरा ईद के बाद अचानक बुखार और डायरिया का प्रकोप फैल गया था। उस दौरान लगभग 150 लोग बीमारी की चपेट में आए थे। उस समय भी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का दावा किया था। लेकिन एक वर्ष बाद फिर इसी तरह की घटना सामने आने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पिछली घटनाओं से क्या सबक लिया गया?
गांव में दहशत, परिजन चिंतित
नयागांव में वर्तमान समय में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बेहद परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में व्यापक स्वास्थ्य शिविर लगाकर सभी बच्चों की जांच कराई जानी चाहिए और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।