नैनीताल में वन विभाग का बड़ा कदम!वन्यजीवों पर नजर रखने की नई तकनीक, नैनीताल में रेडियो टेलीमेट्री का लाइव डेमो
नैनीताल और चम्पावत वन प्रभाग के वनकर्मियों के लिए रेडियो टेलीमेट्री तकनीक पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर बाघ और गुलदार से जुड़े मामलों को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करना और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना रहा।
ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन (AITE) 2022 के अनुसार वेस्टर्न सर्कल क्षेत्र में 200 से अधिक बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जो नैनीताल और चम्पावत वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में नैनीताल वन प्रभाग में मानव-बाघ और मानव-गुलदार संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिसे देखते हुए आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इसी कड़ी में 5 मई 2026 को आयोजित इस कार्यशाला एवं डेमो सत्र में लगभग 50 वनकर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. मेराज अनवर ने बाघों की पारिस्थितिकी पर विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद रेडियो टेलीमेट्री की अवधारणा, उपकरण, इसके विभिन्न घटकों और उपयोग पर गहन सत्र आयोजित किए गए।
कार्यशाला में टेलीमेट्री के कानूनी और नियामक पहलुओं के साथ-साथ डेटा विश्लेषण की जानकारी भी साझा की गई। इसके अलावा रेडियो कॉलर, सैटेलाइट टैग, एंटीना और रिसीवर जैसे उपकरणों का फील्ड में लाइव प्रदर्शन किया गया। विभिन्न स्तनधारी प्रजातियों के लिए रेडियो कॉलर डैशबोर्ड का लाइव डेमो भी दिखाया गया। रेडियो टेलीमेट्री तकनीक के माध्यम से संदिग्ध वन्यजीवों की नियमित निगरानी संभव है, जिससे न केवल मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है, बल्कि वन्यजीवों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर ऐसे जानवरों का रेस्क्यू, उपचार और पुनर्वास भी किया जा सकता है।