विमान हादसाः पंचतत्व में विलीन हुए उत्तराखंड के स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह! छलक आई हर आंख, डेढ़ साल पहले ही हुई थी शादी

Plane Crash: Squadron Leader Prashant Singh from Uttarakhand laid to rest; eyes welled up with tears—he had been married just a year and a half ago.

देहरादून। असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए दर्दनाक विमान हादसे में शहीद हुए उत्तराखंड के वीर सपूत स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह को शनिवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका पार्थिव शरीर जब देहरादून जिले के सेलाकुई स्थित उनके आवास पहुंचा तो पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और हर ओर गमगीन माहौल दिखाई दे रहा था। शहीद प्रशांत सिंह का पार्थिव शरीर सेना के वाहन से सेलाकुई के राजावाला रोड स्थित श्रीरामपुरम कॉलोनी लाया गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सैन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उनके आवास पर पहुंचे। हर कोई नम आंखों से देश के इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था। गौरतलब है कि 13 जून को असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना का एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस भीषण हादसे में भारतीय वायुसेना के पांच जांबाज जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इनमें उत्तराखंड के स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह भी शामिल थे। हादसे की सूचना मिलते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई थी। शनिवार को जब शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो परिजनों का दर्द फूट पड़ा। महज 32 वर्ष की आयु में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रशांत सिंह ने करीब आठ वर्षों तक भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दीं। वे अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे।  प्रशांत सिंह का निजी जीवन भी अभी नई शुरुआत के दौर में था। करीब डेढ़ वर्ष पहले, 23 नवंबर 2024 को उनका विवाह हुआ था। शादी के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था और भविष्य को लेकर कई योजनाएं बनाई जा रही थीं। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनके असामयिक निधन से पत्नी, माता-पिता और पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शहीद प्रशांत सिंह के पिता उमेश सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने अपने शहीद साथी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सैन्य परंपराओं के अनुसार पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और वातावरण भावुक हो उठा। हजारों लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बलिदान को नमन किया।