उत्तराखंड हाईकोर्ट में मदरसा एक्ट को चुनौती! राज्य सरकार ने दाखिल किया जवाब, 10 जून को होगी अंतिम सुनवाई
नैनीताल। हाईकोर्ट में उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा मदरसा व स्कूल को लेकर बनाए गए एक्ट के मानकों को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश के खंडपीठ में हुई, जिसमें राज्य सरकार द्वारा आज अपना काउंटर पेश किया गया, जिसके बाद अंतिम सुनवाई के लिए कोर्ट ने 10 जून की तिथि नियत की है। बता दें कि केबीएन सोसाइटी उधमसिंह नगर में मदरसों का संचालन करते हैं जो धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा देने का काम करते हैं और उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त हैं और 2006 से मदरसे का संचालन कर रहे हैं। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 20-25 के प्रावधान जिसमें मदरसे और स्कूली शिक्षा को मिश्रित करते हुए एक्ट बनाया गया है, जो मानक स्कूली शिक्षा के मानकों को लागू किया गया है। इन मदरसों द्वारा इतने कम समय में इन मानकों को पूरा नहीं किया जा सकता है। ऐसे में आने वाले सत्र में यह मदरसे बंद होने की कगार पर होंगे, जिसमें 550 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और इनके बंद होने से छात्रों का भविष्य आधार में लटक जाएगा, जो भारत के संविधान के आर्टिकल 30 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 30 (Article 30) भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों (educational institutions) की स्थापना और प्रशासन (establishment and administration) करने का मौलिक अधिकार (fundamental right) देता है।