झारखंड में जिंदल ग्रुप का महा-धमाका: $71,000$ करोड़ के मेगा निवेश का ऐलान,लगेगा परमाणु प्लांट और नया स्टील कारखाना
रांची। वैश्विक व्यापारिक अवरोधों और अंतरराष्ट्रीय टैरिफ अनिश्चितताओं के बीच भारतीय स्टील उद्योग और झारखंड राज्य के लिए एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में से एक 'जिंदल स्टील ग्रुप' ने झारखंड में 71,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का बड़ा ऐलान किया है। इस मेगा निवेश के जरिए राज्य में न सिर्फ 60 लाख टन क्षमता का नया स्टील प्लांट स्थापित किया जाएगा, बल्कि पर्यावरण अनुकूल 'ग्रीन स्टील' के उत्पादन के लिए देश का पहला निजी परमाणु और सौर ऊर्जा प्लांट भी लगाया जाएगा।
जिंदल स्टील ग्रुप के वाइस चेयरमैन वी.आर. शर्मा ने खुलासा किया। उन्होंने भरोसा जताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय स्टील निर्माण पूरी तरह प्रतिस्पर्धी बना हुआ है और देश जल्द ही 30 करोड़ टन कच्चे स्टील के उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल कर लेगा। वाइस चेयरमैन वी.आर. शर्मा ने बताया कि जिंदल ग्रुप साल 2007 से ही झारखंड में सक्रिय है और रांची के पास पतरातू में कंपनी का प्लांट पहले से काम कर रहा है। अब राज्य के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए 71,000 करोड़ रुपये के निवेश को तीन बड़े प्रोजेक्ट्स में बांटा गया है। राज्य में अत्याधुनिक तकनीकों से लैस नया स्टील प्लांट लगाया जाएगा, जिसकी उत्पादन क्षमता 60 लाख टन होगी। ग्रीन स्टील' बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए कंपनी 1,400 मेगावाट क्षमता का न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करेगी, जिससे मिलने वाली बिजली पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होगी। इसके साथ ही 650 मेगावाट का एक विशाल सोलर पावर प्लांट भी लगाया जाएगा। परमाणु और सौर ऊर्जा को मिलाकर कंपनी लगभग 2,000 मेगावाट गैर-जीवाश्म (नॉन-फॉसिल) बिजली पैदा करेगी, जिससे कोयले पर निर्भरता खत्म होगी और कार्बन उत्सर्जन को शून्य के स्तर पर लाने में मदद मिलेगी। कच्चे माल (लौह अयस्क और कोकिंग कोल) की उपलब्धता पर बात करते हुए वी.आर. शर्मा ने झारखंड सरकार की नई नीतियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा,भारत के कुल लौह अयस्क भंडार का 26 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले झारखंड में है। राज्य सरकार ने अब खनन क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की जो नीति अपनाई है, उससे निवेशकों के बीच भारी भरोसा पैदा हुआ है। यदि यह गति बनी रही, तो कच्चे माल की कोई कमी नहीं होगी। आधुनिक दौर की मांग को देखते हुए जिंदल ग्रुप अपने नए और पुराने प्लांट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा तेजी से बढ़ा रहा है। वाइस चेयरमैन के मुताबिक, उत्पादन बढ़ाने, संभावित तकनीकी खराबियों का पहले से अनुमान लगाने (प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस) और कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एआई तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। यह महा-निवेश न केवल झारखंड में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए भारत को वैश्विक स्तर पर 'ग्रीन स्टील' का सबसे बड़ा हब बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।