देश में गूंजा झारखंड का नाम: स्वच्छता और हरियाली में रांची का राहे बालिका आवासीय विद्यालय पूरे देश में अव्वल

Jharkhand Makes Waves Nationwide: Ranchi’s Rahe Girls' Residential School Tops the Country in Cleanliness and Greenery

रांची। झारखंड की बेटियों ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाया है। राजधानी रांची के राहे प्रखंड स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी 'स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग' में इस विद्यालय ने 99.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश के हजारों सरकारी और निजी स्कूलों को पछाड़कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए विद्यालय को 'सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट', एक लाख रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि और विद्यालय के प्रधानाध्यापक को देश-विदेश के एजुकेशनल एक्सपोजर विजिट का सुनहरा अवसर मिलेगा। 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस रेटिंग का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यालयों में सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और सतत विकास की गतिविधियों को बढ़ावा देना है। राहे के इस स्कूल ने जिन प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, वे इस प्रकार हैं। छात्राओं के लिए वॉटर प्यूरीफायर, अत्याधुनिक हैंडवॉशिंग यूनिट और अलग से स्वच्छ शौचालयों की उपलब्धता। सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग संग्रहित करने की वैज्ञानिक व्यवस्था के साथ-साथ तरल अपशिष्ट  का बेहतर प्रबंधन। परिसर में विशाल रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और बिजली बचाने के लिए ऊर्जा दक्षता के पुख्ता इंतजाम। औषधीय पौधों की बागवानी, छात्राओं के बैठने के लिए खूबसूरत 'इको पार्क' और स्कूल की दीवारों पर सोहराय कला व स्वच्छता के प्रेरक संदेश। मार्च 2022 में स्थापित हुए इस आवासीय विद्यालय ने अपनी स्थापना के महज चार वर्षों के भीतर ही राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बड़े झंडे गाड़ दिए हैं. यह विद्यालय अपनी बेहतर कार्यप्रणाली के दम पर देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरा है। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2024-25 में आयोजित 'राष्ट्रीय जल पुरस्कार' (नेशनल वाटर अवॉर्ड) में भी इस विद्यालय ने देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त कर अपनी धाक जमाई थी। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस शानदार सफलता के पीछे स्कूल की 'बाल संसद' की छात्राओं की सबसे बड़ी और सक्रिय भूमिका रही है। छात्राओं ने पूरी जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ दैनिक स्तर पर स्वच्छता अभियानों, पौधरोपण, जल संरक्षण और कचरा पृथक्करण की कमान संभाली। अध्यापकों का कहना है कि यहां स्वच्छता और हरित गतिविधियां केवल किसी प्रतियोगिता की तैयारी नहीं, बल्कि छात्राओं की दैनिक जीवनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। विद्यालय की लेखापाल सारिका उपाध्याय और सहायक शिक्षिका फूलमणि बाड़ा ने इसे पूरे विद्यालय परिवार की सामूहिक तपस्या का फल बताया है।  वहीं स्कूल की छात्रा मनीषा कुमारी और होलिका कुमारी ने बेहद गर्व के साथ कहा, "पूरे देश में पहला स्थान मिलना केवल हमारे विद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की सामूहिक उपलब्धि है। हमारे स्कूल के इस मॉडल से प्रेरणा लेकर देश के दूसरे विद्यालय भी अपने परिसरों को स्वच्छ और हरा-भरा बना सकते हैं। इस गौरवपूर्ण मुकाम तक पहुंचाने में शिक्षिका फूलमणि बाड़ा, वर्तमान लेखापाल सारिका उपाध्याय, पूर्व लेखापाल सौरभ कुमार सिंह सहित समस्त शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और बाल संसद की छात्राओं का अतुलनीय योगदान रहा है, जिन्होंने साबित कर दिया कि सही प्रबंधन से सरकारी स्कूल भी देश में शीर्ष स्थान पा सकते हैं।