अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी का तूफान, सबसे तेज शतक से लेकर सर्वाधिक छक्कों तक रचे ऐतिहासिक कीर्तिमान
अंडर-19 वनडे विश्व कप 2026 के फाइनल में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे मुकाबले में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे इस खिताबी मुकाबले में भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। हालांकि चौथे ओवर में एरॉन जॉर्ज (9 रन) के रूप में भारत को पहला झटका लगा, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। आयुष म्हात्रे और वैभव सूर्यवंशी ने दूसरे विकेट के लिए तूफानी साझेदारी करते हुए इंग्लिश आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं। दोनों ने चौकों-छक्कों की बरसात कर दी। खासकर वैभव सूर्यवंशी का बल्ला आग उगलता नजर आया। महज 55 गेंदों में शतक जड़कर उन्होंने अंडर-19 विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक लगाया। इससे पहले उन्होंने 32 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया था, यानी 50 से 100 तक पहुंचने में उन्होंने सिर्फ 23 गेंदें लीं। वैभव सूर्यवंशी ने अपनी ऐतिहासिक पारी में 80 गेंदों पर 175 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 15 चौके और 15 छक्के निकले। वह अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड भारत के उन्मुक्त चंद और मंजोत कालरा के नाम था। वैभव भारत की ओर से अंडर-19 विश्व कप फाइनल में शतक लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बने हैं।
इतना ही नहीं, वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 विश्व कप के एक संस्करण में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। उन्होंने इस टूर्नामेंट में कुल 30 छक्के लगाए, जिससे उन्होंने 2022 में डेवाल्ड ब्रेविस द्वारा बनाए गए 18 छक्कों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। फाइनल मुकाबले में ही उन्होंने एक पारी में 15 छक्के लगाकर अंडर-19 वर्ल्ड कप की एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का 18 साल पुराना रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया। 17वें और 15वें ओवर में स्पिनर फरहान अहमद की गेंदों पर लगाए गए लगातार छक्कों और चौकों ने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। वैभव की यह पारी सिर्फ आक्रामक ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड्स से भरी रही। वह अंडर-19 विश्व कप इतिहास में चार बार 50 से अधिक रन 100 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने। आयुष म्हात्रे ने भी कप्तानी पारी खेलते हुए 51 गेंदों में 53 रन बनाए। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 90 गेंदों में 142 रन की साझेदारी हुई, जिसने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। फाइनल में वैभव सूर्यवंशी का यह प्रदर्शन न सिर्फ भारत के लिए खिताबी उम्मीदों को मजबूत करने वाला रहा, बल्कि यह संकेत भी दे गया कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य का एक और चमकता सितारा मिल चुका है।