हरिद्वार में अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता को अभिलेख देने के निर्देश

High Court Takes Strict Stance on Encroachments in Haridwar; Directs Petitioner to Submit Records

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में हरिद्वार जिले की चक सड़कों, सार्वजनिक स्थानों, नहरों और जलस्रोतों पर हुए अतिक्रमण के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को सभी संबंधित अभिलेख सक्षम प्राधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तुत किए गए अभिलेखों के आधार पर संबंधित अधिकारी निर्धारित समयसीमा के भीतर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन को नियमों के तहत प्रभावी कदम उठाने को कहा है। मामले में हरिद्वार निवासी हरीश चंद्र ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि जिले की चक सड़कों, गांव के सार्वजनिक रास्तों, नहरों और जलस्रोतों पर बड़े पैमाने पर कब्जा कर लिया गया है। याचिका में कोर्ट से इन स्थलों की पहचान, सीमांकन और पुनर्स्थापना के निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया था कि जब तक इन मार्गों और सार्वजनिक स्थलों का सीमांकन पूरा नहीं हो जाता, तब तक वहां किसी भी प्रकार के निर्माण, पंजीकरण या भूमि से संबंधित अन्य गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता उपलब्ध दस्तावेजों को संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई की जा सके। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कानून की प्रक्रिया का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। इस आदेश के बाद प्रशासन पर अतिक्रमण के मामलों में सक्रिय कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं।