हल्द्वानीः चित्रशिला धाम में विवादित चौपाटी पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई! विरोध के बाद सील किया गया क्षेत्र, सीएम तक पहुंचा था मामला

Haldwani: Administration takes major action against the controversial 'Chaupati' at Chitrashila Dham! Area sealed following protests; the matter had reached the Chief Minister.

हल्द्वानी। नैनीताल जनपद के रानीबाग स्थित पवित्र चित्रशिला धाम में धार्मिक आस्था से जुड़े विवाद के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विवादित चौपाटी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को सील कर दिया। लंबे समय से स्थानीय नागरिकों और पहाड़ी आर्मी के पदाधिकारियों द्वारा इस मामले को लेकर विरोध दर्ज कराया जा रहा था। चित्रशिला धाम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है और यहां वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के तर्पण, धार्मिक अनुष्ठानों और अंतिम संस्कार से जुड़े संस्कारों के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप था कि धाम के समीप कथित रूप से अतिक्रमण कर चौपाटी संचालित की जा रही थी, जहां चाउमीन, मोमोज और अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानें लगाई गई थीं। इससे न केवल धार्मिक वातावरण प्रभावित हो रहा था, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाएं भी आहत हो रही थीं। स्थानीय नागरिकों का कहना था कि जिस मार्ग से अंतिम यात्रा और पार्थिव शरीर श्मशान घाट तक ले जाए जाते हैं, उसी स्थान पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होना धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत है। इस मुद्दे को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर क्षेत्र के लोगों और सामाजिक संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया। मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचने के बाद उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा और धार्मिक आस्था के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम नैनीताल के नेतृत्व में राजस्व, नगर प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर विवादित चौपाटी को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को खाली कराते हुए चौपाटी को ध्वस्त कर दिया और संबंधित स्थान को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की भी तैनाती की गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के आसपास किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माण या नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियां किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएंगी।