चमोली टनल हादसा: चारों तरफ अंधेरा, घुटती सांसें और बचाओ-बचाओ की चीखें,घायलों ने बयां किया खौफनाक मंजर

Chamoli tunnel tragedy: Darkness all around, gasping for breath, and screams for help—the injured recounted the harrowing scene.

चमोली। अचानक एक तेज धमाका हुआ और चारों तरफ अंधेरा छा गया और पानी-मलबे का भयंकर सैलाब हमें बहा ले गया। टनल में ऑक्सीजन खत्म हो रही थी, दम घुट रहा था और हर तरफ सिर्फ 'बचाओ-बचाओ' की चीखें गूंज रही थीं।" चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भयानक हादसे से जिंदा बचकर निकले मजदूर जब अस्पताल के बेड से यह आपबीती सुनाते हैं, तो उनकी आवाज कांप उठती है। दुर्घटना के बाद जिला अस्पताल गोपेश्वर में इलाज करा रहे घायल मजदूर अभी भी गहरे सदमे में हैं। मजदूरों के मुताबिक, अगर समय रहते रेस्क्यू टीम न पहुंचती, तो कई और जानें जा सकती थीं।

चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टीआर टनल में हुए हादसे से सुरक्षित बाहर निकले घायल मजदूर अब भी सदमे में हैं। टनल के भीतर अचानक आए मलबे, पानी और पत्थरों ने कुछ ही पलों में ऐसा भयावह मंजर पैदा कर दिया कि मजदूरों को अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और कई मजदूर ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाने लगे। मलबा भरने के साथ टनल में ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो गया, जिससे कई मजदूरों का दम घुटने लगा। छत्तीसगढ़ निवासी घायल मजदूर सुनील दीवान ने जिला अस्पताल में हादसे का खौफनाक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह टनल के भीतर सरिया से सेटरिंग बनाने के काम में लगे थे। हादसे के समय करीब 17 मजदूर एक जगह पर काम कर रहे थे। अचानक करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज हुई और देखते ही देखते भारी मलबा, पानी और पत्थर तेज गति से टनल के भीतर आने लगे। मलबे के तेज धक्के से कई मजदूर दूर जा गिरे, जबकि कुछ उसके नीचे दब गए। सुनील ने बताया कि मलबे के बहाव ने उन्हें टनल के बाहर की तरफ धकेल दिया। कई मजदूर कीचड़ में आधे तक फंस गए थे और किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। घायल मजदूरों के मुताबिक, टनल में कई जगह से मलबा और पानी आने के कारण कुछ ही देर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगा। अंदर मौजूद मजदूरों की सांस फूलने लगी। कई लोग मलबे के बीच आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में हर तरफ घबराहट फैल गई। मजदूर एक-दूसरे को आवाज देकर मदद के लिए पुकार रहे थे। सुनील ने बताया कि हादसे के दौरान सबसे बड़ा डर यह था कि कहीं मलबा और पानी पूरी टनल को न भर दे। उन्होंने कहा कि समय रहते राहत-बचाव अभियान शुरू होना उनके लिए जिंदगी बचाने वाला साबित हुआ। मजदूरों ने बताया कि जिस हिस्से में हादसा हुआ, वहां बुधवार को मिट्टी खिसकने की घटना सामने आई थी। इससे उस हिस्से में धंसाव की आशंका बनी हुई थी। हादसा टनल के करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में हुआ। यह टनल दुर्गापुर से सियासैंण तक करीब तीन किलोमीटर लंबी बनाई जा रही है। ओडिशा निवासी मजदूर जगेश्वर टनल से निकलने वाले पानी को पंप के जरिये बाहर निकालने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि शाम करीब 6:10 बजे अचानक तेज आवाज सुनाई दी। आवाज इतनी भयावह थी कि उन्हें किसी बड़ी अनहोनी की आशंका हुई। इसी दौरान टनल की बिजली भी गुल हो गई। जगेश्वर हादसे वाली जगह से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर थे। तेज धमाके जैसी आवाज सुनने के बाद उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को इसकी जानकारी दी। हादसे के बाद राहत और बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू किया। टनल से बाहर निकाले गए मजदूरों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। भयावह अनुभव से गुजर चुके मजदूरों के चेहरे पर अब भी डर साफ दिखाई दे रहा है। उनके लिए टनल के भीतर बिताए वे कुछ मिनट जिंदगी के सबसे खौफनाक पलों में शामिल हो गए हैं।